जिले का सेवायोजन कार्यालय। सोमवार का पहला कार्यदिवस। आवेदन करने के लिए नौजवानों की कतार लग गई। दस बजते ही कर्मी अपने पटल पर पहुंच गए और एक के बाद एक पंजीकरण शुरू कर दिया गया। लेकिन यहां कर्मचारी-अफसरों की कमी से काम प्रभावित हो रहा है। जिला सेवायोजन अधिकारी की कुर्सी बीते 10 माह से खाली है। ऊधमसिंह नगर की जिला सेवायोजन अधिकारी अनुभा जैन को यहां का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
अमर उजाला की टीम सोमवार की सुबह सेवायोजन कार्यालय पहुंची, तो विभागीय कर्मी मुस्तैदी से काम में मशगूल थे। मगर कर्मियों की कमी का असर काम पर पड़ रहा था। इससे निपटने के लिए विभाग पंजीकरण का काम अनुसेवक कृष्ण सिंह से कराने को मजबूर था। सेवायोजन अधिकारी, अंवेषक कम संगणक, प्रशासनिक अधिकारी के पद रिक्त हैं। नीलिमा, मोहन सिंह सहित तमाम नौजवान भविष्य की चाहत में पंजीकरण कराने को लाइन में लगे थे। एक अभ्यर्थी को पंजीकरण में 8 से 15 मिनट लग रहे थे। रोजगार के लिए पंजीकरण करने वाला सेवायोजन कार्यालय अपनी आंतरिक खामियों से जूझ रहा है।
प्रभारी का इंतजार कर रहा शिक्षण एवं मार्गदर्शन केंद्र
एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों को पढ़ाने के लिए शिक्षण एवं मार्गदर्शन केंद्र हैं। केंद्र के प्रभारी सहायक सेवायोजन अधिकारी, अनुदेशक, आशुलिपिक, वरिष्ठ सहायक की कुर्सियां खाली हैं। सिर्फ कंप्यूटर और भाषा के अनुदेशक के हवाले यह केंद्र है। उपनल से तैनात अनुदेशक हीराबल्लभ कुलेठा ने बताया केंद्र की 36 की क्षमता है, लेकिन 29 छात्र ही पंजीकृत हैं। र इन्हें पढ़ाने वालों की संख्या नाकाफी है। सात कंप्यूटरों के जरिए शिक्षण कार्य होता है।
डीपीआरओ संबद्ध हुआ वाहन
अधिकारी ही नहीं यहां संसाधनों की भी कमी है। सेवायोजन विभाग के पास वाहन तो था, लेकिन यह जीप भी महकमे से दूर है। प्रशासन ने इसे जिला पंचायत राज विभाग को संबद्ध किया गया।
बेरोजगार भत्ते का 15 माह से इंतजार कर रहे बेरोजगार
जिले के 1055 पात्र बेरोजगारों को बेरोजगार भत्ते के लिए चयनित किया गया। मगर अगस्त 2014 से ये युवक-युवतियां भत्ते का इंतजार कर रहे हैं। विभाग का कहना है कि भत्ते के लिए 3.13 करोड़ रुपये की मांग की गई है। अलबत्ता अक्तूबर तक बेरोजगारी भत्ते की पात्रता वाले बेरोजगारों की तादाद 1602 है। वहीं जिले में अक्तूबर तक कुल पंजीकृत बेरोजगार 22823 है।