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लोहाघाट में 118 अतिक्रमण चिह्नित

Mon, 23 Nov 2015 10:25 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट
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हाईकोर्ट के आदेश पर जिला प्रशासन द्वारा गठित समिति ने पार्वती फिलिंग स्टेशन से लेकर पंचेश्वर टैक्सी स्टेंड तक अतिक्रमण चिह्नीकरण का काम पूरा कर लिया गया है।
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1962 में हुए बंदोबस्त के समय की सड़क पर बाद में हुए 118 अतिक्रमणों को चिन्हित किया गया है। 17 अतिक्रमणों को हटाने के लिए बाकायदा न्यायालय ने आदेश जारी कर दिया है। अतिक्रमण को हटाने के लिए एसडीएम सीएस डोबाल की अध्यक्षता में समिति का गठन कर उन्हें नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। सर्वेक्षण कार्य पूरा होने के बाद एसडीएम की अध्यक्षता में समिति के अधिकारियों, कर्मचारियों की हुई बैठक में चर्चा की गई।

एसडीएम के अनुसार प्रथम चरण में सर्वेक्षण का कार्य पूरा होने के बाद अब संबंधित लोगों को मंगलवार से एनएच की ओर से नोटिस जारी किए जाएंगे। जिसमें निर्धारित समय के अंतर्गत उनसे स्वयं अतिक्रमण हटाने को कहा जाएगा। इसके उपरांत यदि अतिक्रमण नहीं हटाए गए। तो प्रशासनिक कार्यवाही के तहत यह काम किया जाएगा।
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 बैठक में तहसीलदार बीएस रौतेला, एनएच के ईई मनोहर धर्मसत्तू, एमसी पांडेय, बीसी जोशी, रेंजर दीप जोशी, एसओ मनोज रतूड़ी, राजस्व निरीक्षक चंद्र प्रकाश, उप निरीक्षक शंकर बंग्याल, जगदीश राम, नगर पंचायत के अभियंता ललित भट्ट तथा लोनिवि के अमीन रामी राम मौजूद थे।  एनएच के अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग की नगरीय क्षेत्र में न्यूनतम आवश्यकता 15 मीटर तथा अन्य स्थानों में अधिकतम 24 मीटर तक सड़क को चौड़ा किया जाना है।

स्टेशन बाजार से हटेंगे कच्चे फड़
 न्यायालय से जारी सूची के अनुसार सबसे पहले स्टेशन बाजार के ऊपरी छोर के 17 कच्चे फड़ों को हटाया जाना है। जिसमें नारायण राम, दिनेश ढेक, जाकिर हुसैन, जौहर हुसैन, गोविंद बल्लभ, मोहन खर्कवाल, ललित खोलिया, संजय जोशी, उमेश जजरिया, गोविंद राम, बेनी प्रसाद, रमेश पुनेठा, सफीक अहमद, किरन जुकरिया, गिरीश खोलिया, मोहन जजरिया, कैलाश खर्कवाल के फड़ शामिल हैं।

अतिक्रमण हटाने में भेदभाव का आरोप
अतिक्रमण की जद में आने वाले उमेश गहतोड़ी, मनोज जोशी, देबू जजरिया ने प्रशासन पर हाईकोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या करने का आरोप लगाया है। उनका कहना कि उच्च न्यायालय ने संपूर्ण अतिक्रमणों को हटाने का आदेश दिया है। प्रशासन ने नियमानुसार अतिक्रमण हटाने का शपथ पत्र भी दिया था। लेकिन अब अतिक्रमण हटाने में भेदभाव किया जा रहा है।
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