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अनीता का संघर्ष अभी थमा नहीं...

Thu, 07 Mar 2019 11:03 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन सुरेंद्र राज लडवाल  पाटी (चंपावत)।
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महिला अनीता देवी। - फोटो : अमर उजाला
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कर्म करो बस तुम अपना लोग उसे जानेंगे ही, आज नहीं तो कल ही सही लोग तुम्हें पहचानेंगे ही...। इसी वाक्य के सहारे 21 वर्ष की आयु में बेवा हुई अनीता अपने बच्चों को अक्सर प्रेरित करती हैं। आज से 16 साल पहले 2003 में पति सतीश चंद्र का निधन हो गया था। अनीता को समझ में नहीं आ रहा था कि उसके दो मासूम बच्चों का भविष्य अब क्या होगा। प्रतिकूल हालात में भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। 

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बच्चों की पढ़ाई की खातिर पाटी विकासखंड के दूरस्थ गांव बेतलाड़ को छोड़कर अनीता 80 किलोमीटर दूर पाटी में किराये पर रहने आ गईं। यहां कमाई के लिए मजदूरी का काम शुरू किया। अनीता एक-एक पैसा जोड़कर न केवल बच्चों को अच्छी शिक्षा दे रही हैं बल्कि अपने लिए उन्होंने एक मकान भी बना लिया है।

अनीता का बड़ा बेटा चंपावत जवाहर नवोदय विद्यालय में ग्यारहवीं में पढ़ रहा है। जबकि छोटा बेटा पाटी के एक अच्छे स्कूल में आठवीं में पढ़ रहा है। अनीता का कहना है कि उसका सपना बच्चों को पढ़ा कर कामयाबी की राह दिखाने और टूटे लोगों को हार न मानने का जज्बा देना है।
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पाटी निवासी डॉ. घनश्याम शर्मा का कहना है कि कठिन हालात में मेहनत कर अनीता न केवल खुद आगे बढ़ रही है बल्कि दूसरों को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा और हिम्मत दे रही है। 


आगे बढ़ने कोई सीमा नहीं 
लोहाघाट (चंपावत)। 35 साल की लोहाघाट की सीमा ने अपनी जीवटता से दिखा दिया कि उनके लिए आगे बढ़ने की कोई सीमा नहीं है। मुश्किल परिस्थितियों से सामना कर उन्होंने पहले खुद स्वरोजगार की राह अपनाई और बाद में कमजोर और जरूरतमंद महिलाओं को रोजगार दिया। सीमा लोगों को स्वच्छता अभियान और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के प्रति लोगों को जागरूक कर रही हैं। स्वच्छता और समाज सेवा में बेहतरीन योगदान के लिए जून 2017 को मुख्यमंत्री ने सीमा देवी को राज्य स्वच्छता गौरव सम्मान से भी नवाजा। 

 महज 16 वर्ष की उम्र में 1999 में विवाह होने के बाद 10 वर्ष तक वह परिवार की जिम्मेदारी निभाने में लग गई। पति मुकेश कुमार के बेरोजगार होने के कारण परिवार का भरण-पोषण करने, पढ़ाई का शौक पूरा करने के लिए सीमा ने आठवीं से आगे की पढ़ाई शुरू करने के साथ ही एक निजी स्कूल में आया का काम करना शुरू कर दिया।

बाद में उन्होंने हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा प्रथम श्रेणी से पास की। इस वक्त उनकी बड़ी बेटी काशीपुर से एलएलबी कर रही है। दूसरी बेटी इंटर और छोटा बेटा सातवीं में पढ़ रहा  है। सीमा ने बेहद मामूली रकम से काम शुरू कर उद्योग विभाग की मदद से इसे आगे बढ़ाया। उन्होंने हाथ और मशीन से स्वैटर बुनकर हथकरघा, बच्चों के खिलौने बनाकर बेचने शुरू कर दिए।

धीरे-धीरे उनका कारोबार बढ़ा तो आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को सजावटी सामान, सिलाई-बुनाई का निशुल्क प्रशिक्षण देकर हुनरमंद बनाया। इन प्रशिक्षित महिलाओं को सीमा अपनी ही दुकान में काम भी देती हैं। इस वक्त वह 15 से अधिक महिलाओं को रोजगार दे रही है। 

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