चंपावत। चंपावत जिले के कई हिस्सों में बरसात में भी लोग प्यासे हैं। बाराकोट क्षेत्र के पम्दा गांव के लोग पिछले 28 दिन से पेयजल किल्लत से जूझ रहे हैं। पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त होने से यहां पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इससे लोगों को प्राकृतिक जल स्रोतों और दूरदराज के गधेरों से पानी ढोना पड़ रहा है। नाराज महिलाओं ने बृहस्पतिवार को पम्दा गांव में सांकेतिक प्रदर्शन किया।
पिछले महीने हुई बारिश से पम्दा गांव की पेयजल आपूर्ति बाधित है। नलों से पेयजल आपूर्ति नहीं होने पर लोग दूरदराज के गधेरों से पानी लाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पेयजल आपूर्ति बाधित होने की शिकायत कई बार जल संस्थान के अधिकारियों से की जा चुकी है, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। प्रदर्शन करने वालों में पार्वती जोशी, रूकमणि देवी, खीमा देवी, बबीता जोशी, रेणु, रेवती, आरती, आस्था, नेहा आदि शामिल थे। इधर जल संस्थान के बाराकोट के अपर सहायक अभियंता भुवन भट्ट का कहना है कि क्षतिग्रस्त पेयजल लाइन को ठीक कर एक दिन के भीतर पेयजल आपूर्ति सुचारु कर दी जाएगी।
खाली बर्तनों के साथ काकड़ में हुआ प्रदर्शन
लोहाघाट (चंपावत)। बाराकोट के काकड़ गांव की क्षतिग्रस्त पेयजल योजना अभी भी ठीक न होने से गांव में गंभीर पेयजल संकट पैदा हो गया है। पेयजल किल्लत से जूझ रहे ग्रामीणों ने प्रहलाद सिंह अधिकारी के नेतृत्व में खाली बर्तनों के साथ जल संस्थान के खिलाफ प्रदर्शन किया। जल्द समस्या का समाधान न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।
आक्रोशित ग्रामीणों का कहना था कि 19 जून को हुई भारी बारिश के दौरान गांव की पेयजल योजना क्षतिग्रस्त हुई थी, तबसे इस लाइन की मरम्मत नहीं हो सकी। ग्रामीण पेयजल के लिए दर-दर भटकने के लिए मजबूर हैं। लोग गाड़-गधेरों, हैंडपंपों से पानी लाकर प्यास बुझाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने जल्द पेयजल योजना को चालू नहीं करने पर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी। प्रदर्शन करने वालों में चंचल अधिकारी, धीरज सिंह, गीता अधिकारी, हेमा अधिकारी, सरिता अधिकारी, पूजा, अंकिता, आशा, विकास अधिकारी आदि शामिल थे। इधर एई पवन बिष्ट ने कहा कि क्षतिग्रस्त पेयजल योजनाओं को ठीक कराया जा रहा है।