महाकाली नदी के संगम पंचेश्वर में तीन दिनी एंगलिंग (मत्स्य आखेट) शुरू हो गई है। इसमें देश-विदेश के 15 आखेटक हिस्सा ले रहे हैं। इस अवसर पर गोल्डन महाशीर और स्नोट्राउट प्रजाति के मत्स्य बीज भी नदी में डाले गए। सोमवार को चंपावत के विधायक हेमेश खर्कवाल ने इसका शुभारंभ किया।
इस मौके पर नौसेना के रिटायर्ड एडमिरल (रिटायर्ड) डीके जोशी ने पंचेश्वर को महाशीर एंगलिंग के लिए बेहतरीन स्थान बताया। उन्होंने एंगलिंग को रॉफ्टिंग से जोड़ने का सुझाव दिया तथा नदी में ब्लास्टिंग और करंट से मछली मारने पर सख्ती से प्रतिबंध लगाने पर जोर दिया। विशिष्ट अतिथि ब्लॉक प्रमुख योगेश मेहता ने कहा एंगलिंग से पंचेश्वर को पर्यटन मानचित्र में पहचान मिलेगी।
केएमवीएन के महाप्रबंधक (पर्यटन) टीएस मर्तोलिया ने कहा कि 2000 के बाद इस साल पर्यटन और केएमवीएन संयुक्त रूप से एंगलिंग मीट करा रहा है। अब इसे हर साल कराया जाएगा तथा यहां सुविधाओं के विस्तार का प्रयास किया जाएगा। यही नहीं इसमें स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित कर उन्हें रोजगार से जोड़ा जाएगा। आयोजन को उत्तराखंड एंगुलर्स एसोसिएशन तथा भीमताल शीतजल मत्स्य केंद्र का सहयोग मिला है। इस अवसर पर एडीएम हेमंत कुमार वर्मा, कांग्रेस जिलाध्यक्ष ओंकार सिंह धौनी, एसएसबी के अधिकारी आदि मौजूद थे।
15 नामी मत्स्य आखेटक ले रहे हैं हिस्सा
मत्स्य आखेट में जर्मनी के एरिक लाल, फ्रांस के पैट्रिक थामस, गुजरात के जहांगीर वकील, मणिपुर के कर्नल एस शर्मा, असोम के डोरेन सिंह, महाराष्ट्र के मनीष सिंह, यूएसए के बॉबी, नैनीताल की एस अधिकारी, उत्तराखंड एंगलिंग एसोसिएशन के प्रशांत बिष्ट, मोहन रावल, महिपाल बिष्ट, हुकुम रावत, प्रकाश ब्रजवाल और विशाल विनायक हिस्सा ले रहे हैं। एंगलिंग के दौरान पकड़ी गई मछलियों का वजन, मोटाई, लंबाई आदि का मापन कर उसे वापस नदी में छोड़ दिया जाता है।
स्थानीय लोगों को नहीं मिल सका रोजगार
पंचेश्वर में बीते 9 साल से एक गैर सरकारी संगठन एंगलिंग कराता आ रहा है। लेकिन स्थानीय स्तर पर रोजगार दिलाने में यह प्रतियोगिता अब तक नाकाम रही है। इस इलाके से कोई नामी मत्स्य आखेटक भी नहीं उभर सका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एंगलिंग और राफ्टिंग के लिए मुफीद होने के बावजूद पंचेश्वर प्रमुख पर्यटक स्थल भी नहीं बन सका है।