रीठा साहिब (चंपावत)। लधिया घाटी की धुरी है रीठा साहिब। यह कस्बा गुरुद्वारे के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। इस आध्यात्मिक क्षेत्र के अस्पताल में धरती के भगवान गायब है। न मरीज देखने के लिए कोई डॉक्टर न दवा देने के लिए कोई फार्मासिस्ट।
हफ्ते के पहले दिन सोमवार को आसपास के कई गांवों के लोग अस्पताल पहुंचे, लेकिन उन्हें वहां इलाज पाने के लिए जूझना पड़ा। 60 साल की मन्नती देवी, निर्मला देवी दूर गांव से आए थे लेकिन उन्हें भी दवा के लिए डेढ़ घंटे तक इंतजार करना पड़ा।
एकत्र मरीजों को जब पता चला कि अस्पताल में डॉक्टर से लेकर वार्डब्वॉय तक कोई नहीं है, तो उनमें नाराजगी बढ़ गई। एक व्यक्ति ने सीएमओ को फोन कर मामले की जानकारी दी। तभी 11 बजे बाद एएनएम ने अपने काम के अलावा मरीजों को दवा दी। एएनएम सुमित्रा रानी ने 39 लोगों को कोविड टीके लगाए।
सुबह 9 बजे : बारसी गांव की बीना देवी तीन माह के बेटे मयंक को लेकर उसका इलाज करवाने अस्पताल पहुंची। बच्चे को हल्का जुकाम था, लेकिन अस्पताल में कोई नहीं था। इसलिए बीना को दूसरी जगह ले जाकर मयंक का इलाज करवाना पड़ा।
सुबह 10 बजे : अस्पताल में न डॉक्टर थे और न ही फार्मासिस्ट की कुर्सी में कोई। दोनों अधिकारियों के नदारद होने से इलाज नहीं मिल सका।
सुबह 10:45 बजे : अब तक अस्पताल में 12 लोग इलाज का इंतजार करते रहे लेकिन किसी को कोई राहत नहीं मिली।
सुबह 11:05 बजे : भीड़ देख अस्पताल परिसर में ही स्थित केंद्र की एएनएम सुमित्रा रानी अस्पताल आईं और मरीजों का परीक्षण कर जरूरी दवाएं दीं।
डॉ. मयंक डिमरी अवकाश पर हैं लेकिन फार्मासिस्ट दीपा कश्यप बगैर छुट्टी गायब हैं। फार्मासिस्ट ने व्हाट्स एप के जरिये पाटी के प्रभारी चिकित्साधिकारी को छुट्टी के लिए प्रार्थना पत्र भेजा था, लेकिन छुट्टी स्वीकृत नहीं है। इसलिए उन पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। रीठा साहिब अस्पताल में मंगलवार से वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।
- डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ, चंपावत।