दिसंबर 2012 में दिल्ली में निर्भया के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के सात साल से अधिक बीतने के बाद भी इस जघन्य अपराध को अंजाम देने वालों को सजा नहीं मिलने से न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि तारीख पर तारीख का सिलसिला आखिर कब खत्म होगा। निर्भया की मां और परिजनों के सब्र का यह सिस्टम कितना इम्तिहान लेगा।
जिला अस्पताल सभागार में हुए अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में महिला चिकित्सकों, पैरा मेडिकल कर्मियों और जन प्रतिनिधियों ने बेबाकी से अपनी बात कही। उन्होंने कहा कि पर्याप्त साक्ष्य होने पर भी दोषियों की ओर से कानूनी दांवपेंच के जरिए फांसी को आगे खिसकाना कानूनी खामी है। जिला पंचायत सदस्य सरिता बोहरा की अध्यक्षता मेें हुए संवाद में सभी ने आम राय से कहा कि जल्द से जल्द फांसी दिए बगैर इंसाफ पूरा नहीं होगा।
क्रियान्वयन में है खामी
हमारे कानून कमजोर नहीं हैं लेकिन कारगर क्रियान्वयन न होने से अपराधी चंगुल से बच निकलते हैं। निर्भया के मामले में भी ऐसा ही हो रहा है लेकिन उसके परिजनों ने हिम्मत दिखाते हुए आखिर तक हार नहीं मानी। डॉ. ममता। (07 सीपीटी 08पी)
जल्द न्याय से ही कम होंगे अपराध
निर्भया कांड के अपराधियों को अभी तक सजा न मिलना सभ्य समाज की व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। जल्द न्याय होने से अपराध में कमी आती है। हैदराबाद में पशु चिकित्सक से दुष्कर्म के आरोपियों के साथ जो हुआ वह तरीका भले ही सही न हो लेकिन घटना में न्याय जरूर हुआ। डॉ. राशी भटनागर। (07 सीपीटी 09पी)
सख्त कानून और कारगर क्रियान्वयन हो
अपराध साबित होने पर भी निर्भया के गुनाहगारों को फांसी न मिलना कानूनी खामियों को दर्शाता है। इससे सबक लेते हुए सख्त कानून के साथ इसके असरकारक क्रियान्वयन पर ध्यान देना जरूरी है। डॉ. प्रियदर्शनी। (07 सीपीटी 10पी)
महिला अपराधों की रोकथाम को दूरगामी नीति बने
निर्भया कांड के कसूरवारों को सजा दिलाने के लिए हुए आंदोलन के बावजूद देरी दुर्भाग्यपूर्ण है। कानूनी हीलाहवाली को दूर करने के साथ महिला अपराधों की रोकथाम के लिए दूरगामी नीति भी जरूरी है। शुरुआती दौर से ही बच्चों को अपराध से बचाव के तरीके बताने होंगे। डॉ. दीपिका जोशी।
बच्चों को बैड टच-गुड टच की जानकारी दें
निर्भया कांड के दोषियों को तुरंत सजा हो ताकि समाज में संदेश जा सके। इस वारदात के बाद कई कानूनी बदलाव हुए हैं। दोषियों को सजा के लिए ज्यादा से ज्यादा फास्ट ट्रैक कोर्ट बनें। बच्चों को बैड टच-गुड टच की जानकारी देना माता-पिता का फर्ज है। डॉ. श्वेता खर्कवाल।
उत्पीड़न पर चुप न रहें महिलाएं
महिला सुरक्षा के मामलों में कोई गंभीर नहीं है। सरकारें बदलती हैं लेकिन हालात नहीं बदलते। महिलाएं अपने साथ होने वाले उत्पीड़न को बताने से भी बचती हैं। इस नजरिए को बदलना होगा। बबीता गोस्वामी, काउंसलर।
स्कूलों में रखी जाएं सुझाव पेटिकाएं
निर्भया के गुनाहगारों की फांसी टलना दुखद है। उत्पीड़न करने वाले का विरोध करने को लड़कियों को आगे आना चाहिए। स्कूलों में सुझाव पेटिकाओं के जरिए छात्राओं की दिक्कतों का हल भी किया जा सकता है। सावित्री राय, फैसिलेटर।
सजा में देरी से अपराधियों में खौफ नहीं
निर्भया कांड के दोषियों को सजा मिलने में लंबा वक्त लग गया है। ऐसे अपराधियों को देर से सजा मिलने से बेटियों से लेकर समाज के बड़े तबके में भय का माहौल रहता है। घर से लेकर समाज तक में जागरूकता बढ़ानी होगी। लता बिष्ट।
छात्राओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जाए
निर्भया कांड में दोष साबित होने के बाद भी सजा न मिलना गंभीर है। शातिर अपराधी कानूनी ढिलाई का लाभ उठा रहे हैं। छात्राओं को आत्मरक्षा के प्रशिक्षण के साथ हेल्पलाइन का अधिक से अधिक उपयोग करने की आदत डालनी होगी। स्वास्तिका जोशी, फिजियोथैरेपिस्ट।
वक्त पर सजा से कम होता आपराधिक ग्राफ
निर्भया कांड के अपराधियों को अगर वक्त पर फांसी मिल जाती तो आगे का आपराधिक ग्राफ कम हो जाता। लड़कियों की बेहतर सुरक्षा के साथ अच्छी कानून व्यवस्था जरूरी है। सीमा खान, स्टाफ नर्स।
लड़कों की काउंसलिंग हो
निर्भया मामले में इंतजार लंबा होता जा रहा है। ऐसे मामले फास्ट ट्रैक में चले जहां तयशुदा वक्त में इंसाफ हो। साथ ही समाज में अच्छे बर्ताव के लिए लड़कों की काउंसलिंग की जाए। ललिता कार्की, लैब तकनीशियन। (07 सीपीटी 18पी)
व्यवस्थागत बदलाव जरूरी
निर्भया कांड के दोषियों को जल्द सजा हो। इसके लिए व्यवस्थागत बदलाव जरूरी है। साथ ही हमें अपने स्तर से बेटे और बेटियों को गरिमा और संस्कार के सीख देनी होगी। सत्या।
बेटियों के साथ बेटों को भी दें सही जानकारी
दोषी को तुरंत मृत्युदंड मिले। सुधार के लिए परिवार में अच्छी परवरिश से लेकर समाज को बेटा-बेटी के प्रति नजरिए को बदलना होगा। बेटियों के साथ बेटों को भी सही जानकारी देना जरूरी है। उम्र में बदलाव और समझ भरे रिश्तों को शिक्षा का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। सरिता बोहरा, सदस्य, जिला पंचायत।