चंपावत। चंपावत जिले में इस साल 16 जुलाई को हरेले के मौके पर एक लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। ये संख्या पिछले साल की अपेक्षा महज ग्यारह प्रतिशत है। 2020 में हरेले पर वन, उद्यान, कृषि, जड़ीबूटी, शिक्षा, पुलिस, स्वजल, जल निगम, राष्ट्रीय राजमार्ग खंड, विकासखंड, नगर पालिका आदि ने 823 हेक्टेयर क्षेत्र में 906030 पौधे रोपे थे।
शनिवार शाम को मंडलायुक्त एएस हयांकी की ओर से वीडियो कांफ्रेंसिंग से की गई समीक्षा के दौरान डीएम विनीत तोमर ने बताया कि जिले में लक्ष्य एक लाख पौधों का है, लेकिन प्रयास दो लाख पौधों को लगाने और उन्हें बचाने के लिए कदम उठाने का रहेगा। इसे लेकर वन, ग्राम्य विकास, कृषि, उद्यान विभाग, एसएसबी, आईटीबीपी आदि के साथ बैठक कर कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। पौधे मुख्य रूप से तालाबों के अलावा लोहावती और गंडक नदी के किनारे लगाए जाएंगे।
एक साल में ही नष्ट हो गए 30 प्रतिशत पौधे
चंपावत। पिछले साल सिर्फ हरेले पर नौ लाख से अधिक पौधे लगाए गए। लेकिन इनमें से 30 प्रतिशत पौधे बर्बाद हो गए हैं। यानी पौधे लगाने से ज्यादा बड़ी चुनौती उन्हें बचाना है। लगाए पौधों में से 60 फीसदी पौधे सूख गए हैं। वन क्षेत्राधिकारी केआर टम्टा का कहना है कि पौधों को बचाने का पूरा प्रयास किया जाता है। लेकिन फिर भी घेरबाड़ की कमी से जानवरों द्वारा नुकसान से एक-तिहाई पौधे बच नहीं पाते हैं। वैसे नवंबर 2000 में राज्य बनने के बाद से अब तक चंपावत जिले में 8900 हेक्टेयर जमीन पर 98 लाख से ज्यादा पौधे लगाए जा चुके हैं। लेकिन इनमें से 63 लाख पौधे ही जीवित रह सके। देखरेख की कमी से लेकर अलग-अलग कारणों से 35 लाख पौधे नष्ट हो चुके हैं। (संवाद)