कल तक देश-विदेश के पर्यटकों का आकर्षण का केंद्र रही नेपाल की राजधानी काठमांडू आज पर्यटकों को डरा रही है। भूकंप से तबाही का दंश झेल रहे नेपाल के सामने अब महामारी रोकने की चुनौती है। भय से लोग काठमांडू से पलायन कर रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक साढे़ पांच हजार से ज्यादा शवों को निकाला जा चुके हैं। कई ध्वस्त मकानों के मलबे में अब भी शवों के दबे होने और बारिश के कारण महामारी फैलने का खतरा पैदा हो गया है। करीब साढे़ चार लाख से अधिक नेपाली नागरिक और वहां रह रहे अन्य देशों के लोग काठमांडू छोड़ चुके हैं। भूकंप से काठमांडू और आसपास के जिलों में कई मकानों के जमींदोज होने के साथ ही जबरदस्त जनहानि हुई है। भारत समेत कई देशों की टीमें आपरेशन रेस्क्यू में जुटी हैं।
मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है। अभी और शवों के मलवे में दबे होने का अनुमान है। आपरेशन रेस्क्यू युद्व स्तर पर चल रहा है। बारिश के कारण अब महामारी का खतरा बढ़ गया है। लोगों के चेहरे पर भूकंप की त्रासदी और आंखों में महामारी का खौफ साफ झलक रहा है। स्थिति यह है कि बाहर से आकर बसे लोग भी पलायन कर रहे हैं। वाहनों के अभाव से लोग परेशान हैं। दूतावास के निर्देश पर उत्तराखंड, यूपी और बिहार से बसें मंगाकर यहां फंसे लगभग सभी भारतीयों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। उत्तराखंड से चंपावत जिले के एसडीएम नरेश दुर्गापाल और सीओ प्रताप सिंह पांगती के नेतृत्व में आए रेस्क्यू दल में शामिल टनकपुर के चिकित्सा अधीक्षक डा एचएस हयांकी और चिकित्साधिकारी डा वीके जोशी का मानना है कि मलवे में शवों के दबे होने और ऊपर से बारिश के कारण वायु और जल प्रदूषण से महामारी फैलने का खतरा है।
मनोकामना मंदिर भी नहीं बचा सुरक्षित
काठमांड। काठमांडू से करीब 70 किलोमीटर दूूर स्थित नेपाल का प्रसिद्ध मनोकामना मंदिर भी भूकंप की थर्राहट सेे नहीं बच पाया। मंदिर काफी क्षतिग्रस्त हो गया है। भूकंप से मंदिर का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है औरर प्रवेश पर रोक लगाई दी गई है। करीब 15 किलोमीटर लंबे रोपवे के कारण यह मंदिर पर्यटकोें के आकर्षण का केंद्र रहा है। मनोकामना दर्शन लिमिटेड के एक कर्मचारी के मुताबिक सुरक्षा के लिहाज से केबिल कार का संचालन बंद कर दर्शन पर रोक लगाई गई है।