चंपावत। जिले के सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेताओं को एक महीने पहले बांटे गए अधिकांश लैपटॉप धूल फांक रहे हैं। 90 प्रतिशत से ज्यादा लोगों को लैपटॉप खोलना, बंद करना तक नहीं आता है। वहीं सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के इन केंद्रों को कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के रूप में तब्दील नहीं किया जा सका है।
जिले में 349 सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानें हैं। इन दुकानों में खाद्यान्न को बायोमेट्रिक तरीके से वितरित करने के लिए लैपटॉप बांटे जाने की योजना शुरू हुई। इसके अलावा इन गल्ले की दुकानों को सीएससी का रूप भी दिया जाना था। एक-तिहाई से ज्यादा दुकानों में लैपटॉप, प्रिंटर और बायोमेट्रिक डिवाइस बांटे गए मगर अभी तक किसी भी दुकान में इनका उपयोग नहीं हो सका है। अधिकांश गल्ला विक्रेताओं को लैपटॉप को चलाना भी नहीं आता है। विक्रेताओं को लैपटॉप संचालन का प्रशिक्षण भी नहीं दिया जा सका है। वहीं करीब दस प्रतिशत गल्ला केंद्रों में मोबाइल नेटवर्क की भी भारी दिक्कत है।
सीएससी में होते हैं ये काम
ई-गवर्नेंस प्लान के तहत विभिन्न सरकारी सर्विस को रियायती दर पर आम लोगों तक पहुंचाने का अहम जरिया है। सीएससी में सभी प्रकार के प्रमाणपत्र, आवेदन पत्र, बिलों के भुगतान के अलावा कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, दूरसंचार, बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
पहले मानदेय दो फिर होगा सीएससी का संचालन
सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेताओं के संगठन आदर्श राशनिंग वेलफेयर सोसायटी के जिलाध्यक्ष प्रकाश बोहरा का कहना है कि जबतक उनकी मानदेय भुगतान की मांग पूरी नहीं की जाती सस्ता गल्ला दुकान में कॉमन सर्विस सेंटर का संचालन नहीं किया जाएगा। कहा कि लैपटॉप चलाने का प्रशिक्षण भी देना चाहिए।
जिले के 349 सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेताओं में से 125 को लैपटॉप बांटे जा चुके हैं। 31 अगस्त तक सभी को लैपटॉप दे दिए जाएंगे। वितरण कार्य पूरा होने के बाद गोदाम स्तर पर एक महीने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। अक्तूबर से गल्ले की दुकानों से बायोमेट्रिक तरीके से राशन वितरण और सीएससी केंद्र के रूप में काम करना शुरू कर दिया जाएगा।
- केके अग्रवाल, जिला पूर्ति अधिकारी, चंपावत।