चंपावत। प्रधानमंत्री जनधन खातों के खुलने के बाद से बैंकों में काम का बोझ बेहद बढ़ गया है, लेकिन इसके सापेक्ष स्टाफ नहीं बढ़ा है। उल्टा स्वीकृत पदों के सापेक्ष भी तैनाती नहीं हो रही है। सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की चंपावत शाखा में कर्मचारियों के करीब एक-चौथाई पद खाली हैं। इसकी वजह से न केवल लोगों को परेशानी से जूझना पड़ता है, बल्कि बैंक कर्मियों पर भी काम का अतिरिक्त दबाव है।
एसबीआई की चंपावत शाखा के मुख्य प्रबंधक एनआर जोहरी का कहना है कि लिपिकीय संवर्ग में सात और अधिकारी वर्ग में चार पद स्वीकृत हैं। मगर दोनों वर्गो में 11 के सापेक्ष महज आठ पर ही तैनाती है। फील्ड आफिसर की कमी से कर्ज के निस्तारण में अतिरिक्त समय लग रहा है। पीएम जनधन खातों के बाद बैंकों खातों की संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है। इस वक्त एसबीआई की चंपावत शाखा में ही 16000 से अधिक खाते हैं। इसके अलावा प्रधानामंत्री सामाजिक सुरक्षा बीमा योजना और पीएम जीवन ज्योति बीमा योजना के भी बड़ी संख्या में उपभोक्ता हैं। काम की जिम्मेदारी बढ़ने के बावजूद कार्मिकों की संख्या में बढ़ोत्तरी नहीं होने से कार्यकुशलता पर असर पड़ रहा है।