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राज्य बनने के बाद कोई नया पशु अस्पताल नहीं खुला

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चंपावत। जिले में ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार होने के बावजूद पशुपालन क्षेत्र की अनदेखी हो रही है। इसी कारण अलग राज्य बनने के 17 साल बाद भी जिले में एक भी नया पशु अस्पताल नहीं खुल सका है। पशुपालकों को बीमार मवेशियों के उपचार के लिए मीलों दूर जाना पड़ रहा है।
जिले में स्थित 14 पशु अस्पतालों में केवल छह अस्पतालों में ही फार्मेसिस्टों की तैनाती है। यही नहीं जिले के 26 पशु सेवा केंद्रों में पशुधन प्रसार अधिकारी के 26 पदों में से 11 पद खाली हैं। इस कारण पशुपालकों को विभागीय योजनाओं का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। हालांकि विभाग का कहना है कि पशुधन प्रसार अधिकारियों के खाली पदों को भरने की प्रक्रिया पूरी हो गई है। जिले के लिए 11 पशुधन प्रसार अधिकारियों को ऋषिकेश स्थित पशुलोक में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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पशु प्रजनन केंद्र, अंगोरा फार्म संचालित
चंपावत। पशुपालन विभाग की ओर से जिले में दो फार्मों का संचालन भी किया जा रहा है। इसमें नरियालगांव स्थित पशु प्रजनन केंद्र, जिला मुख्यालय में स्थित अंगोरा शशक प्रजनन केंद्र शामिल है। सीवीओ डॉ. बीएस जंगपांगी के अनुसार नरियालगांव पशु प्रजनन केंद्र में जहां बद्री (स्थानीय नस्ल) गायों पर शोध, अनुसंधान का कार्य किया जा रहा है। वहीं अंगोरा फार्म में ऊन के लिए खरगोशों का रखरखाव किया जा रहा है।
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पर्वतीय क्षेत्र में फार्मेसिस्टों की तैनाती जल्द होगी
चंपावत। सीवीओ डॉ. बीएस जंगपांगी ने बताया कि पशु अस्पतालों में फार्मेसिस्टों के खाली आठ पद खाली हैं। इनमें से पर्वतीय क्षेत्र के सात पदों पर फार्मेसिस्टों की नियुक्ति जल्द होगी। इसके लिए शासन स्तर पर नियुक्ति प्रक्रिया जारी है। टनकपुर पशु अस्पताल को छोड़कर अन्य सभी अस्पतालों में जल्द फार्मेसिस्ट तैनात हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि 14 पशु अस्पतालों में से 13 अस्पतालों में पशु चिकित्सक हैं। पाटी में पशुचिकित्साधिकारी का पद खाली है।
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