पिथौरागढ़। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों वाले सीमांत जिले के अस्पताल विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे हैं। जिले में ढाई लाख महिलाओं के इलाज के लिए जिला अस्पताल में सिर्फ तीन महिला रोग विशेषज्ञ तैनात हैं। अन्य किसी भी अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। ऐसे में महिलाओं को रेफर कर दिया जाता है और वे इलाज के लिए 60 से 120 किमी की दौड़ लगाने के लिए मजबूर हैं।
सीमांत जिले में महिला अस्पताल के साथ एक संयुक्त चिकित्सालय और चार सीएचसी संचालित हैं। जिले की ढाई लाख महिला आबादी के इलाज, गर्भवतियों की जांच, प्रसव के लिए इन सभी अस्पतालों में महिला रोग विशेषज्ञों के नौ पद स्वीकृत हैं। महिला अस्पताल को छोड़कर किसी भी अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं की गई है। धारचूला, गंगोलीहाट, बेरीनाग, मुनस्यारी, डीडीहाट में संचालित अस्पताल सिर्फ रेफर सेंटर बनकर रह गए हैं। इन क्षेत्रों की गर्भवतियों के साथ ही सामान्य महिला मरीजों को जांच, प्रसव और इलाज के लिए जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ रही है।
स्टाफ नर्स के भरोसे हो रहे हैं प्रसव
पिथौरागढ़। जिले में संचालित सीएचसी में हर रोज जांच और प्रसव के लिए औसतन 40 से 60 गर्भवतियां पहुंचती हैं। महिला रोग विशेषज्ञ न होने से स्टाफ नर्स के भरोसे प्रसव हो रहे हैं। कई बार गंभीर स्थिति में गर्भवतियों को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है, इससे उनकी जान आफत में फंसती है। संवाद
एक साल में 108 एंबुलेंस में हुए 60 प्रसव
पिथौरागढ़। महिला रोग विशेषज्ञ न होने से प्रसव के लिए सीएचसी पहुंची गर्भवतियों को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। जिला मुख्यालय लाते समय कई बार गर्भवतियों का 108 एंबुलेंस में प्रसव हो जाता है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि बीते एक वर्ष में सीएचसी से रेफर 60 गर्भवतियों को एंबुलेंस में प्रसव कराने के लिए मजबूर होना पड़ा। संवाद
कोट
महिला रोग विशेषज्ञों की कमी है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति प्रक्रिया गतिमान है। उम्मीद है जल्द रिक्त पदों पर महिला रोग विशेषज्ञों की तैनाती होगी। - डॉ. एचएस ह्यांकी, सीएमओ, पिथौरागढ़।