चंपावत।
डांडा की प्रधान खष्टी देवी, सामाजिक कार्यकर्ता प्रेम सिंह बोहरा समेत गांव के कई लोग यूं तो हर साल दिवाली मनाते रहे हैं, मगर इस बार उनकी दिवाली बिजली की रोशनी से जगमगाएगी। आजादी के सात दशक बाद डांडा गांव में पहली बार बिजली का उजाला हुआ है। डांडा की ही तरह 16 और ग्रामीण क्षेत्र (तोक) ऐसे हैं, जहां के लोग इस बार दिवाली पर्व में दोहरे उल्लास का अनुभव करेंगे।
चंपावत जिले के चारों विकासखंडों के 17 तोक एवं गांवों को बीते एक वर्ष में बिजली संयोजन से जोड़ दिया गया है। पिछले साल तक अंधेरे में दिवाली मनाने वाले इन लोगों की जिंदगी में यह पहला अवसर होगा, जब वे बिजली के उजाले में दिवाली पर्व का आनंद उठाएंगे। यहां के ग्रामीण बताते हैं कि अब तक उनके जीवन में रात के अंधेरे को दूर करने के लिए बस लैंप ही इकलौता सहारा था। बिजली नहीं होने से न टेलीविजन से उनका सरोकार था, न ही मोबाइल चार्जिंग की व्यवस्था होने से मोबाइल सुविधा का लाभ इन्हें मिल पाता था। सबसे ज्यादा दिक्कत स्कूली बच्चों को होती थी। जिन्हें पढ़ाई के लिए लालटेन का सहारा लेना पड़ता था, लेकिन अब इलाके के लोगों के चेहरे में उल्लास है। दिवाली का पर्व तो भरपूर रोशनी से जगमगाएगा ही, उनकी हर रात अंधेरे से दूर होगी।
एक साल में विद्युतीकृत गांव और तोक
चंपावत : डांडा, ककनई, कनलगांव नई बस्ती, बरकुंडा, बिल्हेड़ी।
लोहाघाट : भागड़ा, झारोखा, मेदकोट, परमोउस, रौलगांव, चंचरा।
बाराकोट : गंगाली, बरदोली, गायकाज्यूला।
पाटी : खोला, डांग, नौलगढ़ा।
अगले दो साल में हो जाएगा बचे 402 तोकों में उजाला
चंपावत जिले में करीब 2500 तोकों में से अब भी 402 तोक अविद्युतीकृत हैं। ऊर्जा निगम के अनुसार इन सभी अविद्युतीकृत तोकों को अगले दो सालों में विद्युतीकृृत करने का लक्ष्य रखा गया है। विभाग के अनुसार इन्हें पंडित दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना से विद्युतीकृत किया जाना प्रस्तावित है।
कोट
एक वर्ष में 17 गांव और तोकों को विद्युतीकृत किया जा चुका है। यहां 100 से ज्यादा बिजली संयोजन दिए जा चुके हैं। इसके अलावा काफी लोगों ने विद्युत संयोजन के लिए आवेदन किया है। इन आवेदकों को शीघ्र ही संयोजन दे दिए जाएंगे। -राजेश कुमार, अधिशासी अभियंता, उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड, चंपावत खंड।