मां पूर्णागिररि में दर्शन को आए श्रद्घालुओं की भीड़।
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उत्तर भारत का सुप्रसिद्ध पूर्णागिरि मेला चैत्र नवरात्र के चलते पूरे शबाब पर है। हर दिन हजारों श्रद्धालु देवी मां के दर्शन को पहुंच रहे हैं। लोकसभा चुनाव के चलते फोर्स की कमी से अगले दो दिनों तक मेले की सुरक्षा व्यवस्था चुनिंदा पुलिस कर्मियों और स्वयंसेवकों के कंधे पर टिकी रहेगी। हालांकि अगले दो दिनों में चुनाव के कारण कम श्रद्धालु पहुंचने की उम्मीद है लेकिन ज्यादा श्रद्धालुओं ज्यादा संख्या में उमड़े तो सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चुनौती खड़ी हो सकती है।
इस बार लंबी दूरी की एक्सप्रेस रेल सेवा की सुविधा शुरू होने से मेले के शुरुआती दिन से ही भक्तों की काफी भीड़ उमड़ रही है। उत्तर भारत के विभिन्न क्षेत्रों के साथ ही दूरदराज से रोडवेज की बसों, निजी वाहनों, साइकिलों के साथ ट्रेनों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दरबार में पहुंच रहे हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवी के डोले के साथ भक्तिगीतों पर थिरकते पैदल भी पहुंच रहे हैं। मंदिर समिति अध्यक्ष पं. भुवन चंद्र पांडेय के मुताबिक मंगलवार को करीब बीस हजार से अधिक भक्तों ने देवी मां के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। इधर श्रद्धालुओं की आवक के बीच फोर्स की कमी से मेले सुरक्षा व्यवस्था ढीली हो गई है।
दो दिन पूर्व मेले में बुलाया गया जिले का अतिरिक्त फोर्स भी चुनाव ड्यूटी के लिए वापस चला गया है। अब काली मंदिर, भैरव मंदिर, ठुलीगाड़ थाना और बूम पुलिस चौकी में चुनिंदा पुलिस कर्मी रह गए हैं। इसके अलावा मेला प्रशासन द्वारा रखे गए स्वयंसेवकों पर सुरक्षा का जिम्मा छोड़ा गया है। सीओ नरेेश चंद ने बताया कि 11 अप्रैल को मतदान समाप्त होने के बाद जिले का फोर्स मेला ड्यूटी में लौट आएगा। बाहरी जिलों से भी पर्याप्त फोर्स मिलने की उम्मीद है।
अपनों से बिछुड़ी वृद्धा और किशोरी को परिजनों से मिलाया
पूर्णागिरि मेले की भीड़ में अपनों से बिछुड़ी एक वृद्धा और एक किशोरी को पुलिस ने उनके परिजनों को खोज उनके सुपुर्द कर दिया। कोतवाल चंद्रमोहन सिंह ने बताया कि मिडगांव बट्टा यूपी की रहने वाली विमला देवी (62) पत्नी वासुदेव मंगलवार को ठुलीगाड़ के समीप परिजनों से बिछुड गईं थी, जिसे किसी ने कोतवाली तक पहुंचाया। वहीं संभल जिले की किशोरी दुर्गेश (16) पुत्री सोनपाल पिता और भाई से बिछुड़ गई थी, जिसे चीता मोबाइल पुलिस टीम ने कोतवाली पहुंचाया। कोतवाल ने बताया कि वृद्धा और किशोरी दोनों के परिजनों को खोजकर उन्हें उनके सुपुर्द कर दिया गया।