शारदा नहर का निर्माण 1928 में कृषि भूमि की सिंचाई के लिए कराया गया था। शारदा नहर से यूपी के रायबरेली तक कृषि भूमि की सिंचाई की जाती है। वर्ष 1956 में बनबसा बैराज से करीब साढ़े 12 किमी दूर लोहियाहेड पावर हाउस का निर्माण कराया गया जिसका संचालन शारदा बैराज के पानी से किया जाता है।
शारदा हेडवर्क्स के एसडीओ बृजेश मौर्य ने बताया कि बनबसा से निकाली गई शारदा नहर यूपी के पीलीभीत, बरेली, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, लखनऊ, रायबरेली जिलों की करीब 2208000 एकड़ भूमि की सिंचाई होती है। शारदा नहर की अधिकतम क्षमता 11500 क्यूसेक है। इन दिनों नहर में 5800 क्यूसेक पानी प्रवाहित किया जा रहा है।
इसी नहर से वर्ष 1956 में निर्मित लोहिया हेड पावर हाउस को भी पानी दिया जाता है। लोहिया हेड पावर हाउस की अधिकतम बिजली उत्पादन क्षमता 39 मेगावाट है। लोहियाहेड पावर हाउस से शारदा बैराज को प्रतिमाह दस हजार यूनिट बिजली निशुल्क देने का प्रावधान है।
परिसंपत्तियों का बंटवारे न होने के कारण उत्तराखंड की भूमि पर स्थित शारदा बैराज और उससे निकाली गई नहर पर यूपी का ही अधिकार है। यूपी के एक बड़े कृषि भूभाग पर सिंचाई में मदद देने वाले बैराज और नहर की सुरक्षा की जिम्मेदारी उत्तराखंड के हाथों में है। इसके लिए यूपी से किसी तरह की आर्थिक मदद उत्तराखंड को नहीं दी जाती है। शारदा बैराज की सुरक्षा उत्तराखंड पुलिस की ओर से की जा रही है।