लोहाघाट (चंपावत)। सांसद निधि से होने वाले कार्य के बजट पर रोक से खफा पूर्व राज्यसभा सदस्य महेंद्र माहरा ने मुख्य विकास अधिकारी एसएस बिष्ट के खिलाफ दस करोड़ रुपये की मानहानि का मुकदमा दर्ज कराने का एलान किया है। सीडीओ ने कुछ दिन पूर्व कहा था कि कार्यदायी संस्था ने निविदा प्रक्रिया का पालन नहीं किया और इस वजह से सांसद निधि के संबंधित काम रोके गए हैं। अब सीडीओ का कहना है कि अभिलेख मिल गए हैं और सशर्त बजट जारी कर दिया जाएगा।
माहरा ने प्रेस बयान जारी कर कहा कि उन्होंने चंपावत जिले के दूरस्थ क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को ज्ञान-विज्ञान और तकनीकी शिक्षा से जोड़ने के लिए 22 स्कूलों में 1.48 करोेड़ रुपये की लागत से कार्य स्वीकृत कराए थे। उन्होंने नोडल अधिकारी पिथौरागढ़ और चंपावत जिलाधिकारी से अनुशंसा की थी।
यह कार्य भारत सरकार के उपक्रम भारत दूरसंचार सलाहकार लिमिटेड (टीसीआईएल) को सौंपा गया था। नियमानुसार अधिकारी सांसद निधि की कसौटी पर खरे उतरने के बाद ही प्रस्तावित कार्य को स्वीकृत करते हैं। यह कार्य स्वीकृत कर दिया गया था। माहरा ने कहा कि सीडीओ ने वास्तविक तथ्यों की पड़ताल किए बगैर उन्हें अपमानित करने का कार्य किया है। इससे उनकी प्रतिष्ठा को गहरा आघात पहुंचा है। वह सीडीओ के खिलाफ सक्षम न्यायालय में 10 करोड़ रुपये की मानहानि का मामला दायर करने का फैसला कर चुके हैं।
ये काम होने हैं निधि से
1.48 लाख रुपये लागत की सांसद निधि से चंपावत जिले के 22 स्कूलाें मेें टीसीआईएल कंपनी को काम करना था। स्कूलों में अत्याधुनिक प्रयोगशाला, शौचालय और सौर ऊर्जा से चलने वाले उपक्रम लगाए जाएंगे।
संबंधित संस्था ने उपलब्ध करा दिए हैं अभिलेख
- मैने किसी की मानहानि नहीं की है। केवल टीसीआईएल संस्था की ओर से अभिलेख उपलब्ध न कराने और नियमानुसार टेंडर प्रक्रिया नहीं अपनाने के कारण धनराशि की निकासी पर रोक लगाई गई थी। 24 जुलाई को टीसीआईएल ने अभिलेख जमा करा दिए गए हैं। अब टीसीआईएल को जिला प्रशासन के साथ अनुबंध करने और टेंडरिंग प्रक्रिया अपनाने की शर्त पर बजट अवमुक्त किया जाएगा। -एसएस बिष्ट, सीडीओ चंपावत