उत्तराखंड पलायन आयोग के उपाध्यक्ष एसएस नेगी ने कहा कि आयोग राज्य में जल्द ही पलायन की समस्या पर व्यापक सर्वे करा रहा है। मंगलवार को जिला कार्यालय सभागार में अधिकारियों की बैठक लेते हुए उन्होंने कहा कि बीते एक दशक में पर्वतीय जिलों से लगभग 19 प्रतिशत लोगों का पलायन हुआ है। जिसमें अन्य जिलों की अपेक्षा पौड़ी और अल्मोड़ा जिलों से सबसे अधिक पलायन हुआ है। उन्होंने अधिकारियों से पलायन का कारण और इसे रोकने के सुझाव भी मांगे।
डीएम डॉ.अहमद इकबाल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक सुविधाओं की कमी एवं आजीविका के सीमित संसाधनों का होना, आरामदायक जीवन जीने की लालसा ही पलायन का मुख्य कारण है। उन्होंने कहा कि पलायन रोकने एवं पलायन कर चुके व्यक्तियों के पुन: पहाड़ों पर प्रवास के लिए दुर्गम क्षेत्रों में भी आधुनिक सुविधाएं मुहैया कराने के साथ ही राज्य की सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को और अधिक मजबूत करना होगा।
सीडीओ एसएस बिष्ट ने कहा कि जिले में आलू, अदरक, गडेरी, हल्दी, मिर्च आदि बहुतायत मात्रा में उगाया जाता है, लेकिन सड़क से लगे क्षेत्रों को छोड़कर दूरदराज के किसानों को उसका उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। साथ ही कृषि कार्य में जंगली जानवरों द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाना भी एक प्रमुख समस्या है। अधिकारियों ने कहा कि पहाड़ से पलायन रोकने के लिए गुणवत्तायुक्त शिक्षा व्यवस्था, स्कूलों में पर्याप्त स्टाफ तैनात करना जरूरी है।
साथ ही यहां पर्यटकों की आमद बढ़ाने के लिए पर्यटन स्थलों का विकास करना होगा। बैठक में पलायन आयोग के सदस्य आरएस पोखरिया, एडीएम हेमंत कुमार वर्मा, एसडीएम सीमा विश्वकर्मा, परियोजना निदेशक एचजी भट्ट, जिला विकास अधिकारी आरसी तिवारी सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।
चकबंदी होने से कुछ हद तक रोक लगेगी
अधिकारियों का कहना था कि पर्वतीय क्षेत्र से पलायन का मुख्य कारण छोटी-छोटी जोतों के साथ खेतों के अलग-अलग होने से भी लोगों का खेती की ओर रुझान कम हो रहा है। उनका कहना था कि पहाड़ पर चकबंदी होने से कुछ हद तक पलायन पर रोक लगाई जा सकती है। अधिकारियों का कहना था कि पहाड़ की खेती 90 प्रतिशत महिलाओं पर निर्भर है और उन्हें खेती के उन्नत एवं वैज्ञानिक तरीके, उन्नत खाद-बीज आदि के बारे में मालूम नहीं होता है।
पलायन रोकने के लिए रोजगार के साधन जरूरी
स्थानीय स्तर पर लोगों को सुविधा देने, सब्जी, राशन आदि की सस्ती ढुलान के लिए ईरिक्शा को लाइसेंस देने, रोपवे बेस ट्रांसपोर्ट, पंचकर्म यूनिट, एडवेंचर कोर्स के साथ यहां के किसानों को उसके घर पर ही विपणन की सुविधा देकर कुछ हद तक पलायन पर रोक लगाई जा सकती है। सभी अधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि पहाड़ पर छोट-छोटे उद्योग स्थापित कर एवं रोजगार के साधन विकसित कर पलायन रोका जा सकता है।