लोहाघाट (चंपावत)। माघ का महीना दान-पुण्य करने के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। इस माह में माघी काकड़ी (स्थानीय ककड़ी) के प्रसाद का विशेष महत्व होता है।
माघ में पहाड़ी ककड़ी मिलना बेहद कठिन होता है। इस माह वितरित किए जाने वाले ककड़ी के प्रसाद का विशेष महत्व होता है। लोग माघी काकड़ी का प्रसाद प्राप्त करने के लिए लालायित रहते हैं। जो व्यक्ति माघी काकड़ी का प्रसाद ग्रहण करता है, वह अपने को भाग्यशाली मानता है। 75 वर्षीय हरी आमा का कहना है कि माघी काकड़ी का दान बहुत महादान की श्रेणी में है।
फोर्ती पुल के पास काश्तकार गोपाल दत्त जोशी ने सुरक्षित ढंग से ककड़ी को संभालकर रखा था। रविवार को पूजा-अर्चना के बाद उपवास रखकर माघी काकड़ी का प्रसाद लोगों को वितरित किया। इस मौके पर रेखा जोशी, तनुजा, सुमन, विमला, भुवन बगौली सहित बड़ी संख्या में लोगों ने माघी काकड़ी का प्रसाद ग्रहण किया। माघी काकड़ी का दान करने वाला व्यक्ति सुबह स्नान करने के साथ पूजा-अर्चना और उपवास रखकर इसका प्रसाद वितरित करता है।