चंपावत। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के अंतर्गत बीते सात सालों से मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में पहली कक्षा में नि:शुल्क दाखिले तो हो रहे हैं, लेकिन इन स्कूलों को शिक्षा विभाग से भुगतान नहीं हो पा रहा है। 2016 से इन निजी स्कूलों को एक भी रुपये का भुगतान नहीं हो सका है। अब तक इनका शिक्षा विभाग पर 4.74 करोड़ रुपये बकाया चल रहा है।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत अनुसूचित जाति-जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अनाथ बच्चे, विकलांग वर्ग के 55 हजार रुपये सालाना से कम आय वाले अभिभावकों के बच्चों को पहली कक्षा में नि:शुल्क प्रवेश का लाभ मिल रहा है। प्राईवेट चंपावत जिले के मान्यता प्राप्त 101 प्राइवेट स्कूलों में 2016 में पहली कक्षा में 525 छात्रों के लक्ष्य के सापेक्ष 489 छात्रों ने दाखिला लिया। 2011 से शुरू इस योजना में अब तक पहली से सातवीं कक्षा तक निजी स्कूलों में 2845 छात्र-छात्राएं नि:शुल्क प्रवेश ले चुके हैं। योजना के तहत शुल्क के अलावा इन छात्रों को मध्यान्ह भोजन और पुस्तकें दी जाती हैं। निजी स्कूलों को इन बच्चों के शुल्क का भुगतान शिक्षा विभाग द्वारा किया जाता है।
लेकिन विभाग में बजट के अभाव के चलते विभाग निजी स्कूलों को इस शुल्क का भुगतान नहीं कर पा रहा है। मौजूदा वित्त वर्ष का जिले के प्राइवेट स्कूलों का शिक्षा विभाग पर 2.42 करोड़ रुपये बकाया। पिछली देनदारियों को मिलाकर प्राइवेट स्कूलों का करीब 4.74 करोड़ रुपये बकायेदारी है। मगर शिक्षा विभाग की ओर से अभी तक इस धन का भुगतान इन स्कूलों को नहीं मिल सका है। प्राइवेट स्कूलों के प्रबंधकों का कहना है कि लंबे समय से बकाया रकम नहीं मिलने से भारी दुश्वारी हो रही है। खासकर सीमित संसाधनों वाले स्कूलों के संचालन में परेशानी हो रही है।
कोट
बीते दो साल के बकाएके भुगतान के लिए 4.74 करोड़ रुपये की मांग की गई है। फिलहाल यह राशि अभी नहीं मिल सकी है। धन मिलने के बाद इस इस रकम को ब्लाक संसाधन केंद्रों के जरिए प्राइवेट स्कूलों के खातों में हस्तांतरित कर दिया जाएगा।
विजय पांडेय
जिला समन्वयक, सर्वशिक्षा अभियान, चंपावत।
वर्ष पहली कक्षा में नि:शुल्क प्रवेशार्थियों की संख्या
2011 285
2012 397
2013 485
2014 472
2015 315
2016 520
2017 489
वर्ष बकायेदारी (लाख रुपये में)
2015-16 28.78
2016-17 202.98
2017-18 242.56