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बारहमासी मार्ग में लटके पेड़ सबसे बड़ा खतरा

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चंपावत। मानसून शुरू हो गया है, लेकिन अभी तक टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्माणाधीन बारहमासी मार्ग पर खतरे वाली जगहों में बचाव के पुख्ता उपाय नहीं किए गए हैं। टनकपुर से घाट तक के हिस्से में 11 स्थानों को डेंजर जोन के रूप में चिन्हित किया गया है। यह जगहें पेड़ों के गिरने और भूस्खलन के नजरिए से बेहद संवेदनशील हैं।

निर्माणाधाीन बारहमासी मार्ग पर 2018 से अब तक सड़क हादसे, पेड़ गिरने, मलबे की चपेट में आने से 21 लोगों की मौत हो चुकी है। बरसात में यह खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है। अभी महज 35 किमी हिस्से में ही डामर होने से शेष करीब 86 किमी हिस्से में मिट्टी होने से बरसात में कीचड़ से रपटने का भी खतरा है। राष्ट्रीय राजमार्ग खंड के सहायक अभियंता एनसी पांडेय का कहना है कि चंपावत जिले में टिपनटॉप, अमरूबैंड, सिन्याड़ी, बेलखेत, स्वांला, तिलौन, मानेश्वर, मरोड़ाखान, बापरू, सिंगदा और घाट मलबा और पेड़ के नजरिये से संवेदनशील है। 77 से ज्यादा खोखले पेड़ और लटके पेड़ सबसे ज्यादा खतरा बन रहे हैं। पेड़ों को निस्तारित करने का वन विभाग से आग्रह किया जा रहा है। प्रभागीय वनाधिकारी केएस बिष्ट का कहना है कि पेड़ों के निस्तारण के लिए जरूरी कार्यवाही चल रही है। अलबत्ता बाराकोट क्षेत्र में कुछ स्थानों पर एनजीटी की रोक भी बाधा बन रही है।
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संवेदनशील स्थानों में तैनात रहेगी जेसीबी
चंपावत। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मनोज पांडेय का कहना है कि जिले में खतरे वाले सभी संवेदनशील स्थानों में आपदा से बचाव के लिए कई इंतजाम किए गए हैं। संबंधित कार्यदायी संस्थाओं के अलावा जिला आपदा प्रबंधन की टीमें संवेदनशील स्थानों में तैनात की गई हैं। ब्यूरो
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कोट
मानसून के मद्देनजर बारहमासी मार्ग पर सुरक्षा पहलुओं को लेकर पुलिस ने संबंधित एजेंसियों के साथ संयुक्त मुआयना किया है। मुआयने के बाद पहाड़ियों पर अटके पेड़ों को हटाने, खतरनाक पेड़ों के निस्तारण, मलबे को साफ करना, कॉशन टेप, चेतावनी बोर्ड, क्रश बैरियर लगाने सहित सभी जरूरी उपाय करने के निर्देश दिए गए हैं।
धीरेंद्र गुंज्याल, पुलिस अधीक्षक, चंपावत।
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