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पॉक्सो अधिनियम में आरोपी को सात साल की सश्रम कैद

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चंपावत। नाबालिग को बहला फुसलाकर भगा ले जाने, जबरन विवाह कर शारीरिक संबंध बनाने के मामले में विशेष सत्र न्यायाधीश प्रेम सिंह खिमाल ने अभियुक्त को पॉक्सो अधिनियम के तहत सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
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उसे आईपीसी की अन्य धाराओं में भी सजा सुनाई गई है और पचास हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने पर एक वर्ष की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।

बनबसा क्षेत्र की महिला ने 26 जनवरी 2017 को बनबसा थाने में नई बस्ती झोपड़ पट्टी, मीना बाजार निवासी देवसागर उर्फ बिल्लू उर्फ बृजेश पर उसकी नाबालिग बेटी को भगा ले जाने की तहरीर दी थी। पुलिस ने आईपीसी की धारा 363, 376, 366-ए और पॉक्सो अधिनियम की धारा 3/4 के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को गुजरात से पकड़कर किशोरी को बरामद किया था।
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पुलिस ने मामले में आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया गया। अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो बीडी जोशी ने पैरवी की।


इन धाराओं में सुनाई गई सजा
पॉक्सो की धारा 3/4 के तहत सात साल सश्रम कारावास और बीस हजार रुपये जुर्माना, 376 के तहत सात साल की कैद, बीस हजार रुपये जुर्माना और धारा 363 के तहत तीन साल कैद और दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
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