चंपावत। टनकपुर राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र-छात्राएं पढ़ाई के लिए 150 किलोमीटर दूर पिथौरागढ़ के सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज नहीं जाएंगे। छात्रों ने इस आशय का पत्र उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति को भेजा है। कुलपति ने टनकपुर में शिक्षकों की व्यवस्था नहीं होने तक पिथौरागढ़ के इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाने का आदेश दिया था। इस आदेश की जानकारी लगने पर छात्रों में नाराजगी और बढ़ गई है।
टनकपुर में नवंबर 2016 से शुरू इंजीनियरिंग कॉलेज में इस वक्त यांत्रिक और सिविल ट्रेड में महज 79 छात्र हैं। शिक्षकों की तैनाती नहीं होने से इन छात्रों की अगस्त से शुरू मौजूदा सत्र में एक दिन भी कक्षाएं नहीं चल सकी है। शिक्षकों की तैनाती और पुस्तकालय सहित कॉलेज की अन्य व्यवस्थाओं में सुधार की मांग को लेकर छात्रों ने अगस्त-सितंबर में आंदोलन भी किया था। छात्रों का कहना है कि इसके बावजूद न शिक्षकों की तैनाती हुई और नहीं अन्य व्यवस्थाओं में सुधार हुआ। उल्टा अब उन्हें टनकपुर के बजाय पिथौरागढ़ भेजा जा रहा है। वे पिथौरागढ़ जाने को तैयार नहीं है।
पिथौरागढ़ भेजे जाने का निर्णय न उनके हित में है और नहीं सामर्थ्य में है। छात्रों का कहना है वे किसी भी हाल में पढ़ाई के लिए पिथौरागढ़ नहीं जाएंगे। इस संबंध में तकनीकी विश्वविद्यालय को पत्र भेज दिया गया है। वहीं, टनकपुर व्यापार संघ अध्यक्ष प्रकाश मुरारी का कहना है कि कॉलेज के हालात न सुधरने पर क्षेत्र के लोग निकाय चुनाव आचार संहिता खत्म होने के बाद आंदोलन पर विचार करेंगे।