चंपावत। निकायों में निवर्तमान अध्यक्षों को टिकट देने की बजाय भाजपा और कांग्रेस ने इनकों बाय बाय कहना बेहतर समझा। इसे यूं भी कहा जा सकता है कि पार्टियों ने चंपावत के निकायों में इस बार नए चेहरों को ही परखने का दाव खेला है। पुराने अध्यक्ष शायद इन्हें किसी काम के नहीं लगे। नतीजा यह कि निवर्तमान अध्यक्ष भी पार्टी से विद्रोह कर निर्दलीय मैदान में जम गए हैं।
चंपावत जिले में इस बार नई बनी नगर पंचायत बनबसा को मिलकार कुल चार नगर निकाय हैं। चंपावत नगर पालिका से भाजपा, महिला आरक्षित टनकपुर नगर पालिका से कांग्रेस और लोहाघाट नगर पंचायत से निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत हासिल की थी। चुनाव जीतने के बाद निर्दलीय प्रत्याशी भाजपा में शामिल हो गई थीं।
2018 के चुनाव में टनकपुर और लोहाघाट की अध्यक्ष की सीट भी अनारक्षित है। इसके चलते दोनों सीटों पर निवर्तमान अध्यक्षों के पति भी मैदान में हैं। इनको भी टिकट नहीं दिया गया। चुनाव मैदान में विद्रोह कर उतरे तीनों प्रत्याशियों का आरोप है कि उनके साथ नाइंसाफी की गई है।
2013 के निकाय चुनाव में जीत बने अध्यक्ष
शहर 2013 के अध्यक्ष 2018 में बगावत करने वाले प्रत्याशी
चंपावत पालिका प्रकाश तिवारी प्रकाश तिवारी (भाजपा से विद्रोह)
टनकपुर पालिका लक्ष्मी पांडेय अध्यक्ष पति धर्मानंद पांडेय (कांग्रेस से विद्रोह)
लोहाघाट पंचायत लता वर्मा अध्यक्ष पति गोविंद वर्मा (भाजपा से विद्रोह)
पार्टी नेतृत्व ने तमाम पहलुओं का ध्यान रखकर प्रत्याशी तय किए हैं। इसी वजह से चंपावत से सीटिंग प्रत्याशी और लोहाघाट से निवर्तमान अध्यक्ष के पति को टिकट नहीं दिया जा सका। उन्हें मनाने का प्रयास भी किया गया, मगर वे नाम वापस लेने को राजी नहीं हुए।
रामदत्त जोशी, जिलाध्यक्ष, भाजपा।
पार्टी संगठन ने जीत की सर्वाधिक संभावना के मद्देनजर प्रत्याशियों का चयन किया है। टनकपुर में निवर्तमान पालिका अध्यक्ष पति के बजाय वरिष्ठ कार्यकर्ता को टिकट दिया गया है।
उत्तम देव, जिलाध्यक्ष, कांग्रेस।