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तीन दिन, 23 घटनाएं और 45.64 हेक्टेयर वन क्षेत्र जला

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चंपावत। जिले में इस बार बढ़ते तापमान के कारण चीड़ के वनों में बिखरी पिरुल बारूद का काम कर रही है। हालत यह है कि पिछले तीन दिनों में वनाग्रि की 23 घटनाओं में अलग अलग क्षेत्रों में 45.64 हेक्टेयर क्षेत्रफल वन संपदा जल चुकी है। 15 फरवरी से शुरू हुए फायर सीजन में अब तक वनों में आग लगने की 43 घटनाओं में 73.15 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले वनों को व्यापक नुकसान पहुंचा है।

पाटी, देवीधुरा, क्रांतेश्वर, चौकी में चीड़ के जंगलों में 22 मई को हुई 12 घटनाओं में 22.14 हेक्टेयर, 23 मई को आठ स्थानों में लगी आग में 16.50 हेक्टेयर तथा 24 मई को तीन स्थानों पर लगी आग में सात हेक्टेयर क्षेत्र में वनों को नुकसान पहुंचा है। जबकि पिछले वर्ष आग लगने की कुल 34 घटनाओं में 50.60 हेक्टेयर क्षेत्रफल में ही वनों को नुकसान पहुंचा था। जानकारों का कहना है कि वर्तमान में सिविल वनों के आसपास रहने वाले ग्रामीणों के वनों से संबंधित हक हकूक खत्म किए जाने के कारण जंगलों में आग लगने पर ग्रामीण आग बुझाने में सहयोग नहीं करते हैं। जबकि पूर्व में ग्रामीण पंचायती वनों के साथ ही सिविल वनों में भी आग से निपटने के लिए वन विभाग का सहयोग करते थे।
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प्रभागीय वनाधिकारी केएस कुंवर के अनुसार वनों में आग लगाने संबंधी घटनाओं में अब तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। उनका कहना है कि वनाग्नि से बचने के लिए जहां मिश्रित वन लाभकारी होते हैं, वहीं पिरुल से कोयला बनाकर भी वनों में आग लगने की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है।

बीते साल वनों में आग लगने की हुई थी 34 घटनाएं
चंपावत। प्रभागीय वनाधिकारी केएस बिष्ट के अनुसार जिले में वनाग्नि को लेकर 64740.75 हेक्टेयर वन क्षेत्र संवेदनशील है। पिछले साल आरक्षित क्षेत्र में 20 तथा पंचायती और सिविल वनों के आग लगने 14 घटनाएं हुई थी। आरक्षित वन में 31.90 हेक्टेयर तथा पंचायती और सिविल वनों में 18.50 हेक्टेयर क्षेत्रफल में वन संपदा को नुकसान हुआ। उन्होंने बताया कि वनाग्नि को रोकने के लिए 158 फील्डकर्मी, 69 दैनिक कर्मी तथा 1761 फायर वाचर तथा वायरलेस सैट तैनात किए गए हैं।
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चंपावत जिले में विभिन्न वनों की स्थिति (हैक्टेयर में)
रेंज का नाम चीड़ बांज देवदार मिश्रित वन
चंपावत 3873 2145 114 2815
लोहाघाट 2532 36.55 165 336
काली कुमाऊं 1336 - 9.86 799
देवीधुरा 9604 1646 53 375
भगिंराड़ा 8817 1645 16 न 1370
बूम 924 260 - 16502
दोगाड़ी 26 12 - 6498

परवान नहीं चढ़ी पिरुल से कोयला बनाने की योजना
चंपावत। जिले में चीड़ के वनों से पिरुल एकत्र कर उसका कोयला तैयार करने की योजना परवान नहीं चढ़ पाई है। खेतीखान के कमलेड़ी में कुछ साल पूर्व एक उद्यमी की ओर से पिरुल के कोयले के ब्रिकेट तैयार करने का प्लांट लगाया गया था। लेकिन प्लांट संचालित करने के लिए पर्याप्त पिरुल नहीं मिलने के कारण प्लांट में ताला लटक गया।
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