पाटी क्षेत्र में बीते सात दिनों से जंगल धू-धू कर जल रहे हैं। वन विभाग के तमाम प्रयासों के बावजूद अभी आग पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका है।
दावाग्नि के चलते अब तक करीब 70 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा है। आसमान में भारी धुंध भी छाई है। धुएं और धुंध से लोगों को भारी दिक्कतें हो रही है। बृहस्पतिवार की रात मूलाकोट, भुय्यां, मजियाप, कजीना, मैरोली, मानादेवी, कूंड, चखड़िया, झलकपुर, रौलामेल, धूनाघाट, मेल्टा आदि जंगलों में जगह-जगह आग लगी हुई है। भिंगराड़ा रेंज के अंतर्गत जगह-जगह आग लगी हुई है।
फायर वाचर सहित तमाम वन कर्मी आग बुझाने के लिए मशक्कत कर रहे हैं। मगर भीषण आग होने के चलते उसमें काबू नहीं हो पा रहा है। वन क्षेत्राधिकारी भूपाल सिंह ने बताया कि जगह-जगह लगी आग में करीब 70 हेक्टेयर से ज्यादा जंगल तथा प्राकृतिक संपदा नष्ट हो गई है। कई वन्य जीव जंतुओं के भी नुकसान का अंदेशा जताया जा रहा है।
प्रशासन ने आग बुझाने में सभी का सहयोग मांगा
पाटी (चंपावत)। पाटी के विभिन्न स्थानों पर जंगलों में लगी आग पर काबू पाने को लेकर शुक्रवार को हुई बैठक में एसडीएम निर्मला बिष्ट ने सरपंचों व ग्रामीणों से सहयोग करने की अपील की। उन्होंने वन विभाग से आग को नियंत्रित करने के लिए अधिक नियोजित तरीके से काम करने व स्थानीय सहभागिता के प्रयास बढ़ाने की हिदायत दी। साथ ही जंगल को नुकसान पहुंचाने वालों को चिह्नित कर एफआईआर करने के वन विभाग को निर्देश दिए गए। बताया कि आपदा न्यूनीकरण के लिए एक टीम का गठन किया है जो आग बुझाने के साथ अन्य आपदा की स्थिति में मददगार होगी।
वन क्षेत्राधिकारी भूपाल सिंह ने लोगों को वन कर्मियों के नंबर उपलब्ध करवाने के साथ आग लगने पर प्रशासन को भी जानकारी देने की बात कही। ढरौज के संरपंच ने बताया कि बीती शाम को वन पंचायत में आग लगने पर गांव वालों की मदद से आग को बुझाया गया, परंतु कतिपय अराजक तत्वों ने रात को फिर से जंगल में आग लगा दी। पाटी के सरपंच राजेंद्र लडवाल ने आग बुझाने में संसाधनों की कमी आड़े आने की बात कही। होली-पिपलाटी के सरपंच नरेश भट्ट ने पिछले साल आग बुझाने के लिए लगाए गए मजदूरों की मजदूरी नहीं मिलने की बात कही। बैठक में तहसीलदार मनोरथ लखचौड़ा, बीडीओ अमित ममगाई, त्रिलोचन भट्ट, राजेंद्र लडवाल, चंद्रशेखर भट्ट, कृष्ण राम, सीएस जोशी, विद्याधर जोशी, ईश्वरी राम, राम सिंह मौनी, किशोरी लाल, भवानी देवी, हंसा देवी आदि मौजूद थे।