टनकपुर (चंपावत)। किरोड़ा नाले में रिवर ट्रेनिंग नीति का ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया है। मंगलवार को सीमांकन के लिए राजस्व, सिंचाई व खनन विभाग टीम किरोड़ा नाले में पहुंची तो 24 से ज्यादा ग्रामीणों ने मौके पर पहुंच कर विरोध शुरू कर दिया। टीम को बिना सीमांकन के ही लौटना पड़ा। बाद में ग्रामीणों ने तहसील पहुंचकर सांकेतिक प्रदर्शन किया साथ ही एसडीएम के पेशगार को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने किरोड़ा नाले से खनन चुगान न कराने की मांग उठाई है।
रिवर ट्रेनिंग नीति के तहत सरकार ने किरोड़ा नाले से मलवा निकाल कर नाले को चैनलाइज करनेे को पट्टे आवंटित किए हैं। इसके लिए बाकायदा ठेकेदारों से सरकार के खाते में रॉयल्टी भी जमा कराई गई है। एसडीएम के आदेश पर मंगलवार को उप निदेशक खनि कर्म एवं भूवैज्ञानिक लेखराज, कानूनगो जोत राम, पटवारी वीरेंद्र कुमार, सिंचाई विभाग के एई आरके यादव, सीओ आरएस रौतेला सीमांकन के लिए किरोड़ा नाले पहुंचे। ग्रामीणों को सीमांकन टीम के आने की भनक लगते ही वे विरोध के लिए मौके पर आ धमके।
थ्वालखेड़ा के ग्राम प्रधान सुंदर सिंह बोहरा के नेतृत्व में ग्रामीणों ने सीमांकन टीम का घेराव कर खनन कराने की कार्रवाई का विरोध किया। उनका कहना था कि नाले से खनन गांव के हित में नहीं है। इससे ग्रामीणों की कृषि भूमि कटाव की भेंट चढ़ेगी। प्रदर्शन में ग्राम प्रधान रेनू देवी, कलावती देवी, जीत सिंह, सतीश पांडेय, आनंद प्रकाश, गिरीश शर्मा, दीपा, लक्ष्मी, चंद्रकला, भुवनेश्वरी, लीला भट्ट, सुनीता भट्ट, चंचला देवी, कमला देवी आदि शामिल थे।