चंपावत। वाहनों की नियमित चेकिंग में स्टाफ का टोटा रोड़ा बन रहा है। चंपावत जिले में होने वाली वाहनों की चेकिंग के लिए परिवहन विभाग के पास एकमात्र टीम है। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) पर बनबसा से लेकर घाट तक वाहनों की चेकिंग जैसे-तैसे हो जाती है। लेकिन आंतरिक मार्गों पर वाहनों की नियमित चेकिंग चुनौती बना हुआ है।
चंपावत जिले में ही दो हजार किमी लंबी सड़कें हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग के अलावा करीब 30 आंतरिक मोटर मार्ग हैं। इन मोटर मार्गों पर रोजाना 700 से अधिक वाहनों के जरिए चार हजार से अधिक लोग सफर करते हैं। ग्रामीण मोटर मार्गों पर चलने वाले वाहनों में ओवरलोडिंग से लेकर यातायात के नियमों का उल्लंघन होता है।
लेकिन इन मार्गों परचलने वाले वाहनों की चेकिंग के लिए परिवहन विभाग के पास इक्का-दुक्का अधिकारी हैं। इन सड़कों पर चलने वाले वाहनों की नियमित चेकिंग स्टाफ की कमी से नहीं हो पा रही है। जिले से होकर जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग और आंतरिक मार्गों से गुजरने वाले वाहनों की चेकिंग के लिए तीन टीमों की जरूरत है। लेकिन उपलब्धता मात्र एक टीम की है। जो राष्ट्रीय राजमार्ग समेत तमाम आंतरिक मार्गों पर चेकिंग के लिए नाकाफी है।
राष्ट्रीय राजमार्ग पर घाट से बनबसा तक चेकिंग तो किसी तरह हो जाती है। नेपाल सीमा से लगे तामली, पंचेश्वर, दिगालीचौड़, देवीधुरा, रीठासाहिब, बाराकोट समेत तमाम आंतरिक मोटर मार्गों पर नजर रखना टेढ़ी खीर बना हुआ है। परिवहन विभाग का कहना है कि स्टाफ की कमी से अधिकांश सड़कों पर चेकिंग बेहद चुनौतीपूर्ण है। बावजूद इसके नियमों को तोड़ने वाले वाहनों पर नकेल कसने का प्रयास किया जाता है।
एक साल में 3300 वाहनों पर कार्रवाई हुई
चंपावत जिले में पिछले वित्तीय वर्ष में ओवरलोडिंग, बगैर लाइसेंस, बीमा व परमिट, भार वाहन में सवारी ढोना, फिटनेस की कमी और प्रदूषण समेत तमाम अन्य नियमों की अनदेखी पर 3011 वाहनों के चालान किए गए। 305 वाहनों को सीज किया। 92 लाख रुपये जुर्माना वसूला गया। एआरटीओ रश्मि भट्ट ने बताया कि इस वर्ष मार्च से जुलाई अब तक 500 वाहनों का चालान और 62 वाहनों को सीज किया गया। जबकि 18 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया है।
कोट...........
वाहनों की चेकिंग के लिए जिले में तीन टीमों की जरूरत है। लेकिन विभाग के पास मात्र एक टीम है। कार्यालय के अन्य काम भी इस टीम के जिम्मे हैं। एक टीम में एक एआरटीओ, दो हेड कांस्टेबल, दो कांस्टेबल और एक चालक की जरूरत होती है। स्टाफ की कमी से वाहनों की नियमित चेकिंग में दिक्कतें आ रही है।
रश्मि भट्ट, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी, चंपावत।