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क्रांति दिवस:9 अगस्त के लिए विशेष:

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चंपावत। देश की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले, लोहाघाट, अल्मोड़ा और बरेली जेलों में अंग्रेजी हुकूमत की भयानक यातना सहन करने वाले और 9 अगस्त 1942 को क्रांति दिवस के साथ अंग्रेजों भारत छोड़ो अभियान में शामिल होने वाले सात स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का गांव आजादी के सात दशक बाद भी सड़क सुविधा की बाट जोह रहा है।
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टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग के सूखीढांग से पांच किमी की दूरी में सेनानियों का धूरा चौड़ाकोट गांव स्थित है। गांव में आज भी बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य और संचार सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। धूरा के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चिंतामणी जोशी के पुत्र प्रकाश चंद्र जोशी के अनुसार वर्ष 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री की ओर से सड़क की मांग को जायज बताते हुए धूरा प्राथमिक विद्यालय के निकट से खखराली तोक तक डेढ़ किमी सड़क बनाने के निर्देश ग्रामीण विकास विभाग को दिए थे।

जिसके बाद ग्रामीण विकास विभाग की ओर से सर्वे कर 2016 में डीपीआर तैयार कर मंजूरी के लिए शासन को भेज दी थी, लेकिन आज तक शासन की ओर से स्वीकृति और बजट नहीं मिल पाने से स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के उत्तराधिकारियों में रोष पनप रहा है। सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के अध्यक्ष महेश चौड़ाकोटी का कहना है कि प्रस्तावित सड़क के बनने से धूरा से खखराली, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय धूरा, प्राथमिक विद्यालय गजार, बयाला, सेतीचौड़ समेत 500 से अधिक की आबादी को लाभ मिल सकता है।
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