चंपावत। शहर में व्यापारिक प्रचार भले ही फ्री में होता हो, पर इसके लिए जल्द ही ग्रामीण क्षेत्रों में शुल्क देना होगा। अपनी आय में इजाफा करने के मकसद से जिला पंचायत ने विज्ञापन बोर्ड, होर्डिंग में शुल्क लगाने का निर्णय लिया है। उप विधि के शासकीय गजट में प्रकाशित होने के बाद पंचायत से लाइसेंस लिए बगैर किसी तरह का व्यापारिक प्रचार नहीं किया जा सकेगा। जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी राजेश कुमार का कहना है कि इससे पंचायत को सालाना 8 लाख रुपये तक की आय होने की उम्मीद है।
व्यावसायिक व व्यापारिक गतिविधियों का मुख्य केंद्र शहरी क्षेत्र होते हैं, लेकिन जिले के शहरी क्षेत्रों में विज्ञान बोर्ड, होर्डिंग आदि के लिए कुछ भी खर्च नहीं करना होता है। मगर ग्रामीण क्षेत्रों में व्यवसायिक या व्यापारिक गतिविधियों के प्रचार के लिए जेब ढीली करनी होगी। गांवों में अनुमति के बगैर कोई भी व्यक्ति, फर्म, इकाई या कारखाना साइन बोर्ड या होर्डिंग नहीं लगा सकेगा। राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य मार्ग, लिंक मार्ग या कच्चे मार्गों में इन प्रचार सामग्रियों को लगाने के लिए पांच फीट से 30 फीट का फासला तय किया गया है। 15 वर्ग फीट साइज के होर्डिंग या विज्ञापन बोर्ड तक 500 रुपये प्रति बोर्ड व 15 वर्ग फीट आकार से अधिक होने पर प्रति वर्ग फीट 25 रुपये अतिरिक्त शुल्क देना होगा। उप विधि के अस्तित्व में आने के बाद निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने पर अर्थदंड का प्रावधान किया गया है।
चंपावत पालिका में नहीं है उप नियमावली
नगर पालिका क्षेत्र में व्यापारिक व व्यवसायिक उद्देश्य से लगने वाले होर्डिंग, साइनबोर्ड आदि पर अभी एक भी रुपया खर्च नहीं करना होता है। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी अभिवन कुमार का कहना है कि नगर पालिका परिषद में होर्डिंग से संबंधित उप नियमावली लागू नहीं है। इसके चलते इन होर्डिंग को लगाने की न तो कोई गाइड लाइन है और नहीं कोई शुल्क लिया जाता है।
कोट
ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापारिक व व्यवसायिक उद्देश्य से लगाए जाने वाले विज्ञापन बोर्ड, होर्डिंग आदि पर जिला पंचायत शुल्क लगाएगी। इसके लिए जिला पंचायत बोर्ड ने उप विधि बनाई है। उप विधि पर किसी तरह की आपत्ति या सुझावों के लिए सात मई तक का समय दिया गया है। फिलहाल एक भी आपत्ति प्राप्त नहीं हुई है। शासकीय गजट में प्रकाशित होने के बाद से ये उप विधियां लागू हो जाएंगी।
राजेश कुमार, अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत, चंपावत।