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विद्युतीकरण नहीं, कुर्सी छोड़ेंगी प्रधान धारू!

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चंपावत। प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य) के अंतर्गत देश के अन्य राज्यों की तरह यहां भी हर गांव को विद्युतीकृत करने का लक्ष्य रखा गया है। उजाला के तहत जिले में 19261 परिवारों में उजाला पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। मगर यहां वर्षों पूर्व बिजली के तार, पोल व ट्रांसफार्मर लगे होने के बावजूद सौराई ग्राम पंचायत का भनार तोक अब भी बिजली की रोशनी से नहीं जगमगा सका है। विद्युतीकरण नहीं होने से नाराज सोराई की ग्राम प्रधान अपनी कुर्सी छोड़ 2 मई से डीएम कार्यालय परिसर में अनशन करेंगी।

सौराई ग्राम पंचायत में भनार तोक को छोड़ अन्य तोकों में बिजली है, मगर 2007 में बिजली पोल लगने के बाद भी सोराई ग्राम पंचायत का भनार राजस्व गांव विद्युतीकरण से वंचित है। इसके चलते यहां के 20 परिवार अंधेरे में रात काटने को मजबूर हैं। ग्राम प्रधान धारू बोहरा और उप प्रधान दान सिंह बोहरा का कहना है कि विद्युतीकरण न होने के लिए ऊर्जा निगम के ठेकेदार ग्राम प्रधान पर झूठा आरोप लगा रहे हैं। जन प्रतिनिधियों ने इस संबंध में पूर्व में डीएम को ज्ञापन भेज 30 अप्रैल तक बिजली कनेक्शन नहीं देने पर अपने पदों से इस्तीफा देकर 2 मई से कलक्ट्रेट में अनशन की चेतावनी दी है।
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कोट
भनार में 2007 में बिजली के पोल व ट्रांसफार्मर लगने से ये लाइनें ज्यादातर जगह क्षतिग्रस्त हो गई हैं। अब इस गांव को दीनदयाल विद्युतीकरण योजना में प्रस्तावित कर विद्युतीकृत किया जाएगा। -आरसी पंत, कनिष्ठ अभियंता, यूपीसीएल, चंपावत।
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कई तोकों में लाइनें, मगर उजाला नहीं
चंपावत जिले में सिर्फ भनार तोक ही नहीं, अनेकों ऐसे इलाके हैं, जहां बिजली के पोल खड़े हैं, पर बिजली नहीं है। नेपाल सीमा से लगे चूका, खिरद्वारी, कलढुंगा सहित कई गांवों में वर्षों पूर्व बिजली के खंभे लगे, लेकिन यहां की रात कभी भी रोशन नहीं हो सकी। ग्राम प्रधान लक्ष्मी देवी सहित इन इलाकों के लोग अनेकों बार इस मसले को बीडीसी की बैठकों सहित कई मंचों पर उठा चुके हैं, लेकिन हालात में कोई बदलाव नहीं हो सका। इधर बिजली विभाग का कहना है कि 2013 की आपदा में इन गांवों की बिजली की लाइनें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। अब इन गांवों को दीनदयाल विद्युतीकरण योजना से जोड़ा जाएगा। वहीं भारी जंगल और आपदा ग्रस्त क्षेत्र के चलते चूका गांव को सौर ऊर्जा से विद्युतीकृत करने की बात कही जा रही है।
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