चंपावत। मौसम की तपिश के साथ ही अप्रैल में नगर निकायों की राजनीतिक पारा भी उफान पर है। आठ मई तक नगर निकायों के गठन होने की अनिवार्यता के चलते माना जा रहा है कि अप्रैल के आखिरी सप्ताह में अध्यक्ष और वार्डों के चुनाव हो जाएंगे। सियासतदान और आम शहरी लोगों में इन चुनावों को लेकर खासी उत्सुकता है, मगर अभी तक सीटों के आरक्षण की तस्वीर साफ नहीं होने से उहापोह बना हुआ है। आरक्षण की तस्वीर तो अगले एक सप्ताह में साफ हो सकेगी, मगर सूत्रों के मुताबिक चंपावत जिले की चार में से दो सीटों के आरक्षित होने की संभावना है। इनमें से जिला मुख्यालय और टनकपुर नगर पालिका के अध्यक्ष की सीट के आरक्षित होने की संभावना जताई जा रही है।
पहली बार 2013 में नगर पालिका बनी चंपावत की सीट अनारक्षित रही। मगर इससे पूर्व दो बार लगातार यह सीट आरक्षित श्रेणी में शामिल हुई। 6333 मतदाताओं वाली जिला मुख्यालय की नगर पालिका को लेकर सबसे ज्यादा कयास लगाए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक चंपावत पालिका का अध्यक्ष एक बार फिर आरक्षित वर्ग का होने की संभावना है। बताया जा रहा है कि इस बार यह सीट अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की हो सकती है। इसके अलावा जिले की सबसे बड़ी नगर पालिका टनकपुर के अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने की संभावना जताई गई है। सूत्र लोहाघाट नगर पंचायत के इस बार अनारक्षित होने की बात कह रहे हैं। जबकि पहली बार नगर पंचायत के रूप में अस्तित्व में आए बनबसा के अध्यक्ष पद की कुर्सी के भी अनारक्षित होने की संभावना है।
कोट
नगर पालिका व नगर पंचायतों को लेकर अभी अध्यक्षों के आरक्षण की स्थिति का अनुमोदन नहीं हुआ है। इसी तरह अभी वार्ड सदस्यों के आरक्षण को भी अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। उम्मीद है कि राज्य निर्वाचन आयोग अप्रैल के पहले सप्ताह तक सीटों की स्थिति को अधिसूचित कर देगा।
सुरेश बैनी, प्रभारी, पंचस्थानी निकाय कार्यालय चंपावत।
राज्य बनने के बाद से नगर निकायों की आरक्षण की तस्वीर:
वर्ष 2003: चंपावत: महिला, लोहाघाट:महिला व टनकपुर:महिला आरक्षित।
वर्ष 2008:चंपावत:एससी महिला, लोहाघाट:अनारक्षित व टनकपुर:अनारक्षित।
वर्ष 2013:चंपावत:अनारक्षित, लोहाघाट:ओबीसी महिला व टनकपुर:महिला।
निकाय का नाम मतदाता
चंपावत 6333
लोहाघाट 4746
टनकपुर 13661
बनबसा 4416