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108 : कॉल की गड़बड़ी बनी काल

Tue, 28 Jun 2016 11:06 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत।
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चंपावत। आमतौर पर संकटमोचक बनने वाली आपात चिकित्सा सेवा 108 ने सोमवार को गंभीर मरीज को हायर सेंटर ले जाने में लापरवाही दिखाई। यहां से देरी की वजह से हृदयरोग से पीड़ित गंगा देवी (48) को बचाया नहीं जा सका। तड़के खटीमा के एक प्राइवेट अस्पताल में उनकी मौत हो गई। देरी की वजह 108 को की गई कॉल का उप्र के 108 नंबर पर पहुंचना बताया गया।
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असम में तैनात फौजी कनलगांव निवासी महेंद्र सिंह बोहरा की पत्नी गंगा देवी हृदयरोग से पीड़ित थी। हालत बिगड़ने पर उन्हें जिला अस्पताल लाया गया। इमरजेंसी मेडिकल आफिसर डा.उदय शंकर का कहना है कि सोमवार शाम अस्पताल पहुंची मरीज की हालत ज्यादा खराब थी। गंगा देवी 23 जून को भी अस्पताल आई थीं। हृदय में ब्लॉकेज के चलते उनका ऑपरेशन होना जरूरी था। डा.शंकर का कहना है कि जरूरी उपचार के बाद मरीज की जान को बचाने के लिए हायर सेंटर रेफर किया गया।

मगर मरीज को जिला अस्पताल से ले जाने में करीब एक घंटे का वक्त लग गया। मरीज के साथ आए मोहन भट्ट और अन्य लोगों का कहना है कि आपात चिकित्सा सेवा 108 को कॉल की। बाद में पता चला कि यह कॉल देहरादून न जाकर लखनऊ चली गई। इस गड़बड़ी के चलते यहां से आगे जाने में अनावश्यक देरी की। जबकि 108 सेवा जिला अस्पताल परिसर में पार्क थी। साथ ही ड्राइवर सहित पैरामेडिकल स्टाफ भी मौके पर था। मगर 108 नंबर पर कॉल करने के बावजूद रिस्पोंस में ढिलाई हुई। जिला अस्पताल में खड़ी 108 सेवा मुख्यालय की हरी झंडी का इंतजार करती रही। देरी की वजह से कुछ देर मरीज के अटैंडेंट और 108 स्टाफ के बीच विवाद की भी नौबत आई। सीएमएस डा.आरके जोशी और ईएमओ डा.उदय शंकर के हस्तक्षेप के बाद करीब 55 मिनट बाद तकरीबन 8 बजे 108 सेवा मरीज को लेकर हायर सेंटर के लिए रवाना हुई, लेकिन रास्ते में खटीमा में गंगा देवी की मौत हो गई।
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