कोरोना के कारण इस साल दत्तात्रेय माता सती अनसूया मंदिर में संतान कामना की पूजा नहीं हो पाएगी। ऐसा पहली बार होगा जब मेले के दौरान यह रस्म नहीं हो पाएगी। प्रशासन और मंदिर समिति के बीच शुक्रवार को हुई बैठक में आयोजन सूक्ष्म रूप से करने का निर्णय लिया गया।
गोपेश्वर के मंडल घाटी स्थित अनसूया माता मंदिर में इस साल 28 और 29 दिसंबर को मेला होना है। शुक्रवार को अपर जिलाधिकारी अनिल कुमार चन्याल के साथ हुई मंदिर समिति की बैठक में कई निर्णय लिए गए। हर साल मंदिर में 300 से अधिक बरोही (निसंतान दंपति) संतान प्राप्ति की कामना के लिए आते थे और रातभर बैठकर माता से कामना करते हैं। बैठक में कहा गया कि इस बार कोरोना को देखते हुए सामाजिक दूरी बनाते हुए बरोही के मंदिर परिसर में बैठना संभव नहीं होगा। इसलिए इस साल इसकी अनुमति नहीं होगी। मंडल में देवडोलियों के मिलन के दौरान मेला भी नहीं होगा। इस बार हर देव डोली के साथ 12 लोग ही मंदिर तक जाएंगे। मेले में जाने वाले यात्रियों की संगूड पुल पर थर्मल स्क्रीनिंग और कोविड टेस्ट होगा। हॉट बाजार और भंडारे नहीं लगेंगे। सिर्फ देव डोलियों के साथ चलने वालों के लिए मंदिर समिति भोजन की व्यवस्था करेगी। सांस्कृतिक कार्यक्रम भी नहीं होंगे। बैठक में सीओ पुलिस विमल प्रसाद, एसीएमओ डा. उमा रावत, ईई डीएस रावत व अन्य अधिकारी सहित अनसूया मंदिर ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष बीएस झिक्वांण, मंदिर के पुजारी डा. प्रदीप सेमवाल, प्रवीन सेमवाल, अध्यक्ष ग्राम विकास खल्ला राजेंद्र सिंह नेगी, सचिव वीरेंद्र बिष्ट आदि मौजूद थे।
यह है मान्यता
माता अनसूया मंदिर में बरोहियों को मंदिर प्रांगण में बने एक कक्ष में बैठाया जाता है। मान्यता है कि उन्हें यहां सपने में माता अलग-अलग रूपों में दर्शन देती हैं, जिस बरोही को माता दर्शन दे देती हैं, वह चुपके से उठकर मुख्य मंदिर में पूजा के लिए पहुंच जाते हैं। मान्यता है कि जिस भी बरोही के स्वप्न में कन्या आएगी, तो उसे संतान प्राप्ति अवश्य होती है।