चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ मंदिर के कपाट सोमवार को सुबह 5 बजकर 22 मिनट पर मंत्रोच्चारण के साथ खोल दिए गए। इस दौरान मंदिर में पहुंचे भक्तों के रुद्रनाथ के जयकारों के साथ मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना शुरू हुई। पहली पूजा विश्व कल्याण और देश को कोरोना संक्रमण से मुक्त करने के लिए की गई। कोरोना संक्रमण को देखते हुए मंदिर में सीमित भक्तों को ही जाने की अनुमति दी गई है। रुद्रनाथ मंदिर में भगवान भोलेनाथ के मुख की पूजा होती है।
सोमवार को पनार बुग्याल से रुद्रनाथ जी की उत्सव डोली रुद्रनाथ मंदिर में पहुंची। इसके बाद ब्रह्म मुहूर्त पर शुभ लग्न और नक्षत्र पर पुजारी धर्मेंद्र तिवारी ने रुद्रनाथ मंदिर के कपाट खोले। कपाट खुलने पर भगवान का प्रथम स्नान स्वर्गद्वारी और नारद कुंड के प्राकृतिक जल से किया गया। इसके बाद रुद्रनाथ जी की अभिषेक पूजा की गई। इस दौरान वन देवता की पूजा भी हुई और देशवासियों को कोरोना संक्रमण से मुक्त करने को लेकर मंदिर में महामृत्युंजय मंत्र और वेद मंत्रों के साथ विशेष पूजा की गई। रुद्राष्ठाध्याय का वाचन हुआ और भव्य आरतियां की गईं। इस दौरान कोरोना गाइडलाइन का पूरा ख्याल रखा गया। भक्तों ने सामाजिक दूरी का पालन किया। इस दौरान सीमित संख्या में पुजारी समेत हक हकूकधारी, भगवान की सेवा से जुड़े लोग ही मंदिर में रहे। इस मौके पर सतेंद्र रावत, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य देवेंद्र सिंह बिष्ट के साथ ही सगर और ग्वाड़ गांव के भक्तगण मौजूद रहे।