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पहली बार बस पहुंची तो खुशी से झूमे लोग

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चमोली के जखोला गांव में पहली बार वाहन पहुंचने पर ग्रामीणों ने किया चालक व वाहन का फूल-मालाओं से स्? - फोटो : GOPESHWAR
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लंबे इंतजार के बाद जखोला गांव सड़क से जुड़ गया है। शनिवार को पहली बार गाड़ी गांव में पहुंची तो ग्रामीण खुशी से झूम उठे। उन्होंने ड्राइवर को फूल मालाएं पहनाकर स्वागत किया। अभी ग्रामीणों को सड़क तक पहुंचने के लिए 12 किलोमीटर की पैदल दूरी नापनी पड़ती थी।
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जिला मुख्यालय गोपेश्वर से 60 किलोमीटर की दूरी पर जखोला गांव स्थित है। वर्ष 2010 में शासन ने 19 किमी लंबी हेलंग-डुमक सड़क के निर्माण की मंजूरी दी थी। ल्यारी बाजार से पल्ला गांव तक तीन किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य लोनिवि और इससे आगे 16 किमी का निर्माण पीएमजीएसवाई को सौंपा गया। दो सालों तक वन अधिनियम के कारा सड़क का निर्माण कार्य रुका रहा। उत्तराखंड राज्य निर्माण के बाद से ही इस सड़क के निर्माण की मांग जोरशोर से उठने लगी थी। जनता ने कई बार सड़क के लिए आंदोलन भी किए। आखिरकार सड़क कटिंग कार्य पूर्ण होकर जखोला गांव तक वाहनों की आवाजाही भी सुचारु हो गई है।
ग्राम प्रधान विमला देवी ने बताया कि जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के संघर्ष के बूते सड़क की सुविधा मिली है। कई जगहों पर हार्ड रॉक होने के कारण ठेकेदार सड़क निर्माण अधूरा छोड़कर भाग गए थे। लेकिन ग्रामीणों के संघर्ष के बाद फिर से सड़क निर्माण कार्य शुरू हुआ। आज गांव तक सड़क निर्मित होने पर ग्रामीणों में खुशी का माहौल है।
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बदरीनाथ विधायक महेंद्र भट्ट ने कहा कि जखोला गांव तक सड़क पहुंच गई है। इससे आगे किमाणा, डुमक और कलगोठ गांव को भी जल्द सड़क पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि हमने हर गांव तक सड़क पहुंचाने का संकल्प लिया है। अब कई दूरस्थ गांव भी सड़क से जुड़ गए हैं।
दस साल में निर्मित हुई पांच किलोमीटर सड़क
हेलंग-उर्गम मोटर मार्ग पर ल्यारी बाजार से डुमक-कलगोठ गांव के लिए सड़क निर्माण कार्य वर्ष 2010 में शुरू हुआ था। यहां चट्टानी भाग को काटकर सड़क बनाना लोक निर्माण विभाग और पीएमजीएसवाई के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था। शुरूआत के तीन किलोमीटर चट्टान कटिंग लोनिवि और इससे आगे 14 किलोमीटर सड़क कटिंग का कार्य पीएमजीएसवाई के जिम्मे है। पीएमजीएसवाई अभी तक दो किमी सड़क का निर्माण कार्य कर चुका है। क्षेत्र में बड़ी-बड़ी चट्टानें और घना जंगल है। जिससे कार्यदायी संस्थाओं को पांच किलोमीटर सड़क के निर्माण में दस साल का लंबा वक्त लग गया।
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