240 किमी की पैदल यात्रा तय कर सप्तमी के दिन यात्रा पहुंची बुग्याल
श्रद्धालुओं ने किया झोंड़ा नृत्य, शिव से मिलने के बाद डोली पहुंची वांक गांव
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देवाल। नंदानगर कुरुड़ से सात सितंबर से शुरू हुई मां नंदा की लोकजात यात्रा 240 किलोमीटर की पैदल यात्रा तय करने के बाद सप्तमी के दिन 13 हजार फीट पर स्थित वेदनी बुग्याल पहुंची। यात्रा में छंतोलियां भी शामिल हुईं। यहां नंदा की पूजा-अर्चना की गई और पारंपरिक नृत्य झोंड़ा भी किया गया। इसके बाद नंदा और भगवान शिव का मिलन हुआ। इस दौरान सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे। माना जाता है कि नंदा की डोली के वेदनी बुग्याल पहुंचने के बाद कैलाश से भगवान शिव यहां पहुंचते हैं। शिव से मिलने के बाद नंदा की डोली भक्तों के साथ लौट गई और वांक गांव पहुंची।
शुक्रवार को मां नंदा की लोकजात यात्रा श्रद्धालुओं के साथ वेदनी बुग्याल पहुंची। लोकजात यात्रा में कई गांवों की छंतोलियां भी शामिल हुईं। कुंड के पास स्थित महेश मर्दिनी मंदिर के पंडित कुनियाल ब्राह्मण उमेश कुनियाल और रमेश कुनियाल ने गौरी शंकर की पूजा की और श्रद्धालुओं ने पारंपरिक नृत्य किया। इसके बाद नंदा और शिव का मिलन हुआ। वेदनी पहुंचे लोग नंदा और शिव के लिए ब्रह्मकमल लेकर आए। इसके बाद श्रद्धालुओं ने डोली के साथ वेदनी कुंड और महेश मर्दिनी मंदिर की परिक्रमा की और वेदनी कुंड में पितरों को तर्पण दिया। इसके बाद डोली लौट गई और यात्रा की अगुवाई करने वाले लाटू देवता के निशाण के साथ वांक गांव पहुंची। कुरुड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष नरेश गौड़ ने बताया कि डोली वापसी के विभिन्न पड़ावों से होते हुए 29 सितंबर को देवराड़ा मंदिर के स्वर्ण सिंहासन के गर्भगृह में छह माह के लिए विराजमान हो जाएगी।
देवी की कृपा से श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने बुग्याल में किया यात्री विश्राम
देवाल। लोकजात यात्रा में इस बार देवी की ही कृपा रही कि पर्यटकों ने वेदनी बुग्याल में रात्रि विश्राम किया। इसके बाद पर्यटक रूपकुंड पहुंचे। हाईकोर्ट की ओर से प्रदेश के बुग्यालों में रात्रि विश्राम पर लगी रोक के कारण पर्यटक रूपकुंड नहीं पहुंच पा रहे थे। मगर कोर्ट ने केवल धार्मिक यात्रा के तहत ही बुग्यालों में रात में रुकने की अनुमति दी है। क्योंकि गैरोली पातल से वेदनी बुग्याल और रूपकुंड एक दिन में नहीं पहुंचा जा सकता। ऐसे में बृहस्पतिवार रात को लोकजात यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने वेदनी बुग्याल में रात्रि विश्राम किया। इसके बाद शुक्रवार सुबह श्रद्धालु वेदनी पहुंचे जबकि पर्यटक रूपकुंड पहुंचे। पर्यटकों का कहना है कि मां नंदा की कृपा से ही एक रात को वेदनी बुग्याल में रुकने का मौका मिला। यहां वन विभाग के हट और टेटों में रहे। इसके बाद वन विभाग के रेंजर हरीश थपलियाल के नेतृत्व में पर्यटक और श्रद्धालु वेदनी बुग्याल से रुपकुंड गए। वहीं डीएफओ बदरीनाथ वन प्रभाग चमोली के सर्वेश कुमार दुबे ने कहा कि 21 अगस्त 2018 को आली- वेदनी-बगजी बुग्याल संरक्षण समिति की याचिका पर नैनीताल हाईकोर्ट ने प्रदेश के बुग्यालों में रात्रि विश्राम पर रोक लगाई है लेकिन स्थानीय लोगों के धार्मिक कार्य और लोकजात यात्रा पर रोक नहीं है। संवाद
नंदा की विदाई पर रो पड़े श्रद्धालु
कर्णप्रयाग/गौचर। ब्लाॅक के चमोला, खंडूड़ा, उमट्टा, सिमली आदि गांवों में पाती उत्सव का आयोजन किया गया। देव उत्सव के लिए काफी संख्या में प्रवासी भी गांव पहुंचे। पूजा-अर्चना के बाद नंदा देवी की जैसे ही विदाई होने लगी तो भक्त रो पड़े और नम आंखों से डोली को ससुराल कैलाश के लिए विदा किया। खंडूड़ा गांव में देवराड़ी देवी से भक्तों ने आशीर्वाद मांगा। वहीं, चमोला और उमट्ठा गांव में भी पाती उत्सव का आयोजन हुआ। उमट्टा के अनुज डिमरी, सुधीर डिमरी आदि ने बताया कि इस इस दौरान पश्वा पर देवता भी अवतरित हुए। इस मौके पर पूर्व प्रधान विजय खंडूड़ी, गणेश खंडूड़ी, अरुण खंडूड़ी और उमेश खंडूड़ी सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे। वहीं गौचर में तीन दिनों तक अपने मायके मांडा मंडप मंदिर में रहने के बाद कालिंका देवी भी शुक्रवार देर शाम को ससुराल भट्टनगर के लिए विदा हो गईं। भक्तों ने देवी को ढोल नगाड़ों और पुष्प वर्षा के साथ विदा किया। पंडित राधाबल्लभ थपलियाल, नागेंद्र शास्त्री, बंशीधर शैली, अनसूया प्रसाद, गिरीश जोशी आदि वेदपाठियों ने हवन यज्ञ किया। देवी के भाई रावलनगर के लाटू देवता की अगुवाई में देवी को ससुराल पहुंचाया गया। मौके पर मंदिर समिति के अध्यक्ष उमराव सिंह, पालिका अध्यक्ष अंजू बिष्ट, भीम सिंह, रघुनाथ सिंह आदि मौजूद रहे। संवाद
मां नंदा की शोभायात्रा निकाली
श्रीनगर। नंदा देवी मंदिर में आयोजित सात दिवसीय दुर्गापाठ के अंतिम दिन नगर में नंदा देवी डोली की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। यह शोभा यात्रा गुरुद्वारा रोड से होते हुए वापस नंदा मंदिर पहुंची। पुजारी धीरेंद्र घिल्डियाल ने बताया कि शुक्रवार रात को जागरण, भजन-कीर्तन हुए। इस मौके पर सरोजनी देवी, रंजना मैठाणी, संगीता घिल्डियाल, प्रमिला भंडारी, अनिता गैरोला, अनूप घिल्डियाल, भगवती प्रसाद पुरी और राकेश सेमवाल आदि मौजूद थे। संवाद