मलारी हाईवे पर सातवें दिन वाहनों की आवाजाही सुचारु हो गई है। 17 अक्तूबर की रात से भारी बारिश के कारण हाईवे कई स्थानों पर अवरुद्ध हो गया था। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की ओर से रविवार रात को भापकुंड के पास आए बोल्डर और मलबे को हटाकर हाईवे को सुचारु कर दिया गया है। हाईवे खुलने पर नीती घाटी के ग्रामीणों और सीमा क्षेत्र में मुस्तैद सेना व आईटीबीपी के जवानों ने राहत की सांस ली है।
तिब्बत (चीन) सीमा क्षेत्र को यातायात से जोड़ने वाला मलारी हाईवे अतिवृष्टि के कारण तपोवन से लेकर जुम्मा तक करीब 18 स्थानों पर अवरुद्ध हो गया था। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की ओर से हाईवे को खोलने के लिए 15 जेसीबी और 200 से अधिक मजदूरों को लगाया गया था। तमक नाला और रैणी गांव के पास हाईवे पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। हाईवे को सुचारु करने के लिए बीआरओ की ओर से हिल कटिंग की गई है। बीआरओ के कमान अधिकारी कर्नल मनीष कपिल ने बताया कि हाईवे को पूरी तरह से सुचारु कर दिया गया है। 19 अक्तूबर को मौसम सामान्य होने के बाद हाईवे को खोलने का काम शुरू हुआ था।
निचले क्षेत्रों को लौटने लगे नीती घाटी के ग्रामीण
भारत-तिब्बत (चीन) सीमा क्षेत्र के गांवों के लोग अपने शीतकालीन प्रवास की ओर लौटने लगे हैं। घाटी में भोटिया जनजाति के ग्रामीण निवास करते हैं। ग्रामीण प्रतिवर्ष 20 अक्तूबर से निचले क्षेत्रों की ओर लौटने लग जाते थे लेकिन इस बार हाईवे अवरुद्ध होने के कारण लौट नहीं पा रहे थे। रविवार रात को हाईवे सुचारु होने के बाद सोमवार से ग्रामीणों का शीतकालीन प्रवास की ओर लौटना शुरू हो गया है। नीती गांव के मां भगवती के पुजारी बृजमोहन खाती, वचन सिंह खाती का कहना है कि घाटी का प्रसिद्ध लास्पा मेला संपन्न होने के बाद अब ग्रामीण अपने शीतकालीन प्रवास की ओर लौटना शुरू हो गए हैं। बांपा गांव के धर्मेंद्र पाल, मनोज पाल, धीरेंद्र सिंह गरोड़िया व प्रेम सिंह फोनिया का कहना है कि मलारी हाईवे के बंद होने के चलते वे निचले क्षेत्रों में लौट नहीं पा रहे थे।