बदरीनाथ धाम से माता मूर्ति मंदिर के लिए प्रस्थान करतीं उद्घव जी की उत्सव डोली।
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बामन द्वादशी के पावन पर्व पर शुक्रवार को भगवान बदरीनाथ भक्तों के साथ अपनी माता मूर्ति से मिलने पहुंचे। दिनभर माता के सानिध्य में रहने के बाद भगवान बदरीनाथ अपराह्न साढ़े तीन बजे अपने धाम में विराजमान हो गए। इस दौरान बदरीनाथ धाम के कपाट छह घंटे तक बंद रहे। पुन: बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद माणा गांव में माता मूर्ति मेला भी संपन्न हो गया। भगवान उद्धव, घंटाकरण (क्षेत्रपाल) और माता मूर्ति के अद्भुत मिलन को देखने के लिए माणा, बदरीनाथ, बामणी गांव के श्रद्धालु मंदिर में पहुंचे थे।
कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस बार भी माता मूर्ति मेला सादगी के साथ आयोजित किया गया। बृहस्पतिवार शाम को माणा गांव से घंटाकर्ण भगवान भक्तों संग भगवान बदरीनाथ को माता मूर्ति मंदिर ले जाने का न्योता देने धाम में पहुंचे थे। शुक्रवार को सुबह अभिषेक पूजा के बाद सुबह करीब साढ़े नौ बजे बदरीश पंचायत से भगवान बदरीनाथ के प्रतिनिधि के रूप में उद्धव जी की प्रतिमा को सभा मंडप तक लाया गया और बदरीनाथ धाम के कपाट बंद कर दिए गए। इसके बाद उद्धव जी की उत्सव डोली ने भक्तों के साथ माणा गांव के लिए प्रस्थान किया। बदरीनाथ के रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी, धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल, देवस्थानम बोर्ड के अपर मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह सहित अन्य लोग उद्धव जी की उत्सव डोली के साथ करीब तीन किमी पैदल चलकर माणा गांव स्थित माता मूर्ति मंदिर पहुंचे। मंदिर में रावल ने पूजा अर्चना की। अपराह्न में लगने वाला भगवान बदरीनाथ का भोग भी माता मूर्ति मंदिर में ही लगाया गया। भोग लगाने के बाद अपराह्न तीन बजे अपनी माता मूर्ति से विदा लेने के लिए उद्धव जी की डोली ने बदरीनाथ धाम के लिए प्रस्थान किया और करीब साढ़े तीन बजे उद्धव जी बदरीश पंचायत में विराजमान हुए। माणा गांव की महिलाओें ने माता मूर्ति और बदरीनाथ जी को हरियाली भेंट कर सुख-समृद्धि की मनौतियां मांगीं।
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आज भी माता को दिए वचन का निर्वहन कर रहे बदरीनाथ
बदरीकाश्रम क्षेत्र में माता मूर्ति मंदिर नारायण पर्वत की तलहटी पर स्थित है। मान्यता है कि आदिकाल में भगवान बदरीनाथ जब बदरीकाश्रम क्षेत्र में तपस्यारत थे तो अपने पुत्र को मिलने के लिए माता मूर्ति और पिता धर्म भी बदरीनाथ धाम पहुंचे। तब भगवान बदरीनाथ ने प्रतिवर्ष बामन द्वादशी को माता मूर्ति से मिलने के लिए आने का वचन दिया था। आज भी बदरीनाथ अपनी माता को दिए वचन का निर्वहन करते आ रहे हैं। धाम में नारायण पर्वत की तलहटी को माता मूर्ति तो भीम पुल से बसुधारा तक के क्षेत्र को धर्म क्षेत्र कहा जाता है।
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प्रतिनिधि के रूप में जाते हैं उद्धव जी
बदरीनाथ। बदरीनाथ धाम में भगवान बदरीनाथ की शिला मूर्ति है। शिला पर भगवान बदरीनाथ पद्मासन में तपस्यारत हैं। बदरीनाथ के प्रतिनिधि के रूप में भगवान उद्धव जी ही उत्सव डोली में विराजमान होकर माता मूर्ति से मिलने के लिए जाते हैं। दिनभर माता के सानिध्य में रहने के बाद वे दोपहर बाद बदरीनाथ धाम में विराजमान हो जाते हैं।