जिला अस्पताल में तीन माह से सेवा दे रहे बाल रोग विशेषज्ञ डा. एसके झा छह माह की सृष्टि के लिए किसी भगवान से कम नहीं हैं। जिंदगी और मौत के बीच झूल रही सृष्टि का डा. झा ने लगातार दस घंटे तक उपचार कर उसे जिंदगी लौटा दी है। अब सृष्टि हाथ-पांव से हरकत करने लगी है।
सोमवार को दोपहर में करीब डेढ़ बजे हल्दापानी गांव की दर्शनी देवी रोते-बिलखते छह माह की बेहोश सृष्टि को लेकर आई। यहां बाल रोग विशेषज्ञ डा. झा बिना कोई पर्ची बनाए उसे एनआईसीयू (गहन चिकित्सा कक्ष) में ले गए।
सृष्टि की नसें नहीं मिल रही थी, तो डॉक्टर ने हड्डी में ही निडिल से ग्लूकोज दे दिया। साथ ही हाथ में ही दो-तीन जगह आईबी लाइन (इंटरवेशन) से जीवन रक्षक दवाइयां और ग्लूकोज देना शुरू कर दिया। रात करीब साढ़े दस बजे सृष्टि ने आंखें खोलकर हरकत करनी शुरू कर दी।
जब यह सूचना सृष्टि की मां दर्शनी और दादी को मिली तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अब सृष्टि पूरी तरह से स्वस्थ है। उसे मंगलवार को भी पूरे दिन चिकित्सक और नर्सों की निगरानी में रही।
चिकित्सक डा. झा ने बताया कि डायरिया की वजह से सृष्टि के शरीर में पानी की अत्यधिक कमी हो गई थी। इससे सांस की नली में मां का दूध फंस गया था और उसकी सांस की रफ्तार धीमी पड़ती जा रही थी। ग्लूकोज और जीवन रक्षक दवाइयों से सृष्टि को बचा लिया गया है।
सोमवार को अचानक सृष्टि को उल्टी-दस्त होने लगे। देखते ही देखते उसकी सांसें धीमी पड़ने लगी और वह सुस्त हो गई। उसके हाथ-पांव भी काम नहीं कर रहे थे। हम घबरा गए थे। अस्पताल लाने के बाद सृष्टि को लेकर मन में कई सवाल उठ रहे थे। चिकित्सकों की मेहनत से सृष्टि की जिंदगी लौट आई है। - दर्शनी देवी, सृष्टि की मां