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भूस्खलन से बूंगा गांव खतरे की जद में

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डुंग्री-रतगांव मार्ग के ऊपर से हो रहे भूस्खलन से बूंगा और बुरसोल गांव खतरे की जद में आ गया है। बूंगा गांव में सौ और बुरसाले में 80 से अधिक परिवार रहते हैं। यहां के ग्रामीणों की आजीविका का साधन कृषि है लेकिन लगातार हो रहे भूस्खलन से उपजाऊ भूमि बर्बाद हो रही है और धंस भी रही है। वहीं विधायक ने मौके का निरीक्षण कर विभाग को यहां शीघ्र सुरक्षात्मक कार्य करने के निर्देश दिए।
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वर्ष 2012 में थराली-डुंग्री मार्ग से रतगांव के लिए सड़क निर्माण शुरू किया गया। रतगांव के ग्रामीणों की मांग के कारण सड़क को ढाढरबगड़ से रतगांव के लिए जोड़ा गया जबकि बुरसोल के ग्रामीण सड़क को बुरसोल गांव से रतगांव को जोड़ना चाहते थे। इस कारण सड़क का एलाइनमेंट (समरेखण) बदलना पड़ा और सड़क बूंगा और बुरसोल गांव के काफी नीचे से बनी जिससे अधिक ऊंचाई के कारण सड़क भूस्खलन जोन विकसित हो गया और अब यहां पर लगातार भूस्खलन हो रहा है। भूस्खलन का दायरा बढ़ते-बढ़ते बूंगा गांव तक पहुंच गया है। बूंगा गांव के काश्तकारों की भूमि भी धंस रही है। वहीं बुरसोल गांव के कई खेत बर्बाद हो चुके हैं। ग्रामीण रणजीत सिंह, मदन सिंह, हरपाल सिंह, राजेंद्र सिंह, बलवंत सिंह, दिनेश सिंह आदि का कहना है कि यदि शीघ्र ही सड़क का एलाइनमेंट नहीं बदला गया और भूस्खलन जोन का ट्रीटमेंट नहीं किया गया तो बूंगा गांव और बुरसोल गांव में आपदा आ सकती है। वहीं विधायक भूपाल राम टम्टा ने पीएमजीएसवाई के अधिकारियों के साथ यहां का निरीक्षण किया और पीएमजीएसवाई को इस समस्या के समाधान के लिए शीघ्र सुरक्षात्मक कार्य करने के निर्देश दिए।
वायरक्रेट लगाए जाएंगे
पीएमजीएसवाई के सहायक अभियंता वीरेंद्र भंडारी का कहना है सड़के के नए एलाइनमेंट के लिए सर्वेक्षण किया जा चुका है। वहीं भूस्खलन जोन पर वायरक्रेट लगाए जाएंगे।
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