चारधाम यात्रा मार्ग के बदरीनाथ हाईवे पर है स्थित
कर्णप्रयाग। चारधाम यात्रा मार्ग पर स्थित सिद्धपीठ मां उमा देवी का पौराणिक मंदिर है। माना जाता है कि भारत वर्ष में निराकार मूर्ति का एक मात्र उमा देवी का मंदिर है।
मंदिर समिति के अध्यक्ष रविंद्र पुजारी एवं आचार्य नरेश पुजारी कहते हैं कि जब दक्ष प्रजापति ने पार्वती के पति को शिव को यज्ञ में नहीं बुलाया तो पार्वती हवन कुंड में होम हो गई थी, जिसके बाद पार्वती ने पुन: शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए यहां तपस्या की। तपस्या में पार्वती का चेहरा अदृश्य हो गया था। पौराणिक मंदिर में भगवान शिव, पार्वती, काली, गणेश के अलावा उमा की निराकार चेहरा विहीन मूर्ति है। यही नहीं नवग्रह की पौराणिक मूर्तियां हैं।
ऐसे पहुंचें-
ऋषिकेश या हरिद्वार से टैक्सी या बस से कर्णप्रयाग पहुंचे। यही हल्द्वानी से नैनीताल हाईवे से गैरसैंण होते हुए और अल्मोड़ा से ग्वालदम होते हुए भी कर्णप्रयाग पहुंचा जा सकता है। साथ ही देहरादून गौचर हेली सेवा से गौचर और फिर टैक्सी से महज 10 किमी दूर कर्णप्रयाग में उमा देवी मंदिर, कर्ण मंदिर के दर्शन कर सकते हैं।