चमोली, पौड़ी और अल्मोड़ा जिले से सटे नागचुलाखाल के ग्रामीणों ने विभिन्न समस्याओं को लेकर बैठक की। बैठक में सीमावर्ती गांवों की सुध न लिए जाने का आरोप लगाया गया। कहा गया कि तीनों जिलों के सीमावर्ती गांव आज भी विकास योजनाओं से वंचित हैं।
निर्णय लिया गया यदि आबकारी विभाग की ओर से क्षेत्र में अवैध शराब की तस्करी नहीं रोकी तो आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
बैठक में आरटीआई कार्यकर्ता बलवंत सिंह नेगी ने कहा कि तीनों जिले के 22 से अधिक सीमावर्ती गांव आज भी बैंकिंग सुविधा के लिए 40 से 50 किमी दूर जाते हैं। क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है।
सड़कें न होने से आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ भी ग्रामीणों को नहीं मिल पाता है। चिंथोली के ग्राम प्रधान मंगल सिंह ने कहा कि अस्पताल न होने से कई मरीज घर में ही दम तोड़ देते हैं।
कल्यालिंगुड़ के प्रधान प्रेम सिंह ने कहा कि गांव में जूनियर हाईस्कूल में 86 बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन यहां एक अध्यापक तैनात है। व्यापार संघ के कोषाध्यक्ष बीएस राणा ने कहा कि राष्ट्रीयकृत बैंक न होने से पेंशन सहित मनरेगा और अन्य योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
इस अवसर पर चंदरखाणी की प्रधान लीला देवी, बालादत्त, जैखाल के नारायण दत्त, सुरेंद्र सिंह, पूजा पटवाल, उमेद सिंह, चतुर सिंह, चंद्र सिंह सहित जसखोला, स्यूंणी, बछुवाबाण, दिवागाड़, रोहिड़ा, बीना, हरगढ़, मैखोली, गौल आदि गांवों के ग्रामीण शामिल हुए।