तीन दिवसीय वसंतोत्सव में पहली सांस्कृतिक संध्या गायिका संगीता ढौडियाल के नाम रही। इस दौरान गायक वीरेंद्र राजपूत, धूम सिंह और सरिता बैनोला ने भी एक के बाद एक गीतों की प्रस्तुतियां दीं।
पुलिस मैदान में चल रहे वसंतोत्सव की पहली सांस्कृतिक संध्या में गायिका संगीता ढौडियाल ने दमा दम मस्त कलंदर..., हाय कखड़ी झिले मां... गीतों की प्रस्तुति दी। गायक धूम सिंह के मेरी गाजिणा गीत की प्रस्तुति पर दर्शक पांडाल में ही नाचने लगे।
रविवार को सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारंभ कर्णप्रयाग विधायक डा. अनसूया प्रसाद मैखुरी ने किया। इसके बाद आयोजित जूनियर वर्ग सांस्कृतिक प्रतियोगिता में नगर की 15 टीमों ने प्रतिभाग किया। इसमें पीस पब्लिक स्कूल प्रथम, उत्तराखंड पब्लिक स्कूल व सरस्वती शिशु मंदिर संयुक्त रूप से द्वितीय और राजकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नैग्वाड़ तृतीय रहा।
मांगल गीत प्रतियोगिता में पाडुली गांव ने प्रथम, कोठियाल सैंण ने द्वितीय और बसंत बिहार ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। झुमैलो में कोठियालसैंण, पपडियाणा और बसंत बिहार की टीमों ने क्रमश: प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त किया। महिला वर्ग रस्साकसी प्रतियोगिता में गंगोलगांव की टीम ने बसंत बिहार की टीम को पराजित कर जीत दर्ज की।
तुमारी समौण सांस्कृतिक कला मंच ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दीं। वसंतोत्सव में सरकारी और गैर सरकारी विभागों की ओर से लगाए गए स्टॉलों से लोग खूब खरीदारी कर रहे हैं। इस मौके पर पालिकाध्यक्ष संदीप रावत, अधिशासी अधिकारी शांति प्रसाद भट्ट, सुरेश डिमरी और अशोक रावत आदि मौजूद थे।
सुपिन्यों कु उत्तराखंड सुपिन्यों मां सज्यूं च...
वसंतोत्सव के दौरान रविवार को शाम चार बजे से साहित्यिक संस्था एवं लोक भाषा साहित्य समिति कलश की ओर से कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें कवियों ने स्वरचित कविताओं का पाठ किया।
संस्था के अध्यक्ष ओम प्रकाश सेमवाल ने सुपिन्यों कु उत्तराखंड सुपिन्यों मां सज्यूं च, मुरली दिवान ने मंगतू अब पढ़े कन बैठी, संदीप रावत ने रमकंदी, झमकंदी ऐग्ये वसंत एग्ये, तेजपाल निर्मोही ने रूप्यों की माया, शशि देवली ने नारी तू नारयणी है, शक्तिशाली संस्कारी है, मोहम्मद हासिम ने किसको मालूम था इक रोज ये होना होगा, यहां इंसान का इंसान खिलौना होगा और लक्ष्मी प्रसाद मलगुड़ी ने अजब निराला देख तमाशा अपने भारत देश में, आईपीएल है कामधेनु अब अपने भारत देश में... जैसे कविताओं का पाठ किया।