नंदानगर के अंतिम गांव बंजर भूमि पर ग्रामीणों ने बनाया पितृदेव वन
संवाद न्यूज एजेंसी
नंदानगर। विकासखंड नंदानगर के दूरस्थ और अंतिम गांव सुतोल में ग्रामीणों ने पर्यावरण बचाने के लिए अनोखी पहल शुरू की है। ग्रामीणों ने पूजा-अर्चना के साथ पितृदेव वन में पौधे लगाने का काम शुरू किया। अब गांव का हर परिवार पितरों के नाम पर यहां एक पौधा लगाएगा और उसकी देखरेख भी करेगा।
सुतोल नंदानगर विकासखंड का सबसे दूरस्थ और अंतिम गांव है। यहां उत्तराखंड रत्न डॉ. शिवानंद नौटियाल फाउंडेशन, पितृदेव वन आंदोलन समिति व ग्रामीणों ने बदरीनाथ वन प्रभाग के सहयोग से पितृदेव वन तैयार करने का संकल्प लिया। गांव के समीप नंदा राजजात मार्ग के पास बंजर जमीन में ग्रामीण इस वन को तैयार कर रहे हैं। ग्रामीणों ने पूजा-अर्चना के बाद पौधरोपण कर पितृदेव वन का काम शुरू किया। तय किया गया कि गांव का हर परिवार अपने पितरों के नाम पर यहां पर पौधे लगाएगा। इस अवसर पर समिति के संयोजक भुवन नौटियाल, ग्राम प्रधान राजपाल कुमार, उप प्रधान कमल सिंह, युवक मंगलदल अध्यक्ष बख्तावर सिंह, महिला मंगलदल अध्यक्ष सुषमा देवी, वन पंचायत सरपंच सुलप सिंह, पुष्कर सिंह, देवेंद्र सिंह, धीरेंद्र सिंह मौजूद रहे।
पौधे लगाए
रुद्रप्रयाग। श्राद्ध पक्ष के शुभारंभ पर तल्लानागपुर के ग्राम पंचायत क्वीली में महिलाओं ने अपने पितरों की याद में पौधारोपण किया। सामाजिक कार्यकर्ता डाॅ. सुभाष चंद्र पुरोहित व पर्यावरण प्रेमी शिक्षक सतेंद्र भंडारी की मौजूदगी में पितृ देव वन अभियान के तहत भौंसारी गदेरे में पौधारोपण किया गया। पर्यावरण प्रेमी शिक्षक सतेंद्र भंडारी ने कहा कि हम सभी का कर्तव्य है कि पितृ देव वन का संरक्षण करें। इस मौके पर पार्वती देवी, देवेश्वरी देवी, संगीता देवी, वंदनना देवी, सतेश्वरी देवी सहित अन्य ग्रामीण महिलाएं मौजूद थीं। संवाद