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गौचर मेले में दिखी गढ़-कुमाऊं की संस्कृति

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गौचर मेले में मीना राणा की सांस्कृतिक प्रस्तुति । - फोटो : KARNPRYAG
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गौचर मेले की दूसरी सांस्कृतिक संध्या में दर्शकों को गढ़-कुमाऊं की संस्कृति के साथ राजस्थानी लोक संगीत की मनमोहक छटा देखने को मिली। मेला मंच पर विभिन्न सांस्कृतिक टीमों की प्रस्तुति के बाद लोकगायिका मीना राणा के गीतों की धूम रही।
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लोक गायिका मीना राणा, संजय कुमोला और जितेंद्र पंवार की टीम ने ओ साहिबा दिल मेरू लगीग्ये..., टीरि की राणी पौड़ी की दिवानी..., ह्यूंद का दिन फिर बौड़ि ऐगिन... की सुमधुर गीतों की प्रस्तुति दी। इसके अलावा पल्या गों का मोहना त्वे मां लगी मेरो मन... और लौंडा चंदन... गीतों पर दर्शक जमकर थिरके। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत जयरूपेश कलामंच गोपेश्वर के सांस्कृतिक कार्यक्रमों से हुई और फिर मृणाल रतूड़ी की टीम, जय मां अनसूया सांस्कृतिक कलामंच मंडल, नीतिघाटी कलामंच कौड़िया व पिंडरघाटी बहुउद्देशीय सांस्कृतिक दल के कलाकारों ने लोकनृत्य और गीतों की शानदार प्रस्तुतियां दीं। कुमाऊं से आए गोकुल बिष्ट और साथियों ने कुमाऊंनी लोक संस्कृति तथा राजस्थानी कलाकारों ने झूमर नृत्य का प्रदर्शन किया। इस मौके पर मेलाधिकारी एसडीएम संतोष कुमार पांडेय, तहसीलदार सुरेंद्रसिंह देव, पालिकाध्यक्ष अंजू बिष्ट, प्रकाश शैली, विजय डिमरी, भूपेंद्र बिष्ट, गजेंद्र नयाल, भगवती प्रसाद आदि मौजूद रहे।
मेले में खूब बिक रहे पहाड़ी उत्पाद
गौचर। मेले में सजी दुकानों से पहाड़ी उत्पादों की खूब बिक्री हो रही है। लोग दाल, राजमा, फरड़, भंगजीरा, मंडुवे का आटा, जख्या, सोयाबीन, गहत, ऊनी वस्त्र जैसे उत्पादों की जमकर खरीदारी कर रहे हैं। स्टालों से विकलांग आवेदन फार्म भरने व इसके लिए विशिष्ट पहचानपत्र बनवाने, कॅरिअर काउंसिलिंग और सेवायोजन पंजीकरण की सुविधा भी मिल रही है। समाज कल्याण विभाग की संगोष्ठी में वृद्धावस्था व विकलांग पेंशन, अटल आवास योजना और दिव्यांगजनों को स्वरोजगार की जानकारी दी गई। गोष्ठी में एडीओ समाज कल्याण देवेंद्र पंवार, प्रबंधक वित्त विकास निगम वीरेंद्र बिष्ट थे। संवाद
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