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हिंदी को जन-जन की भाषा बनाने के हों सामूहिक प्रयास

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बुलंदी संस्था की ओर से हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत सुभाष चौक के प्रतीक्षालय हॉल में आयोजित कवि सम्मेलन में राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार पर जोर दिया गया। इस दौरान नवोदित कवियों ने अपनी-अपनी स्वरचित कविताओं का पाठ भी किया।
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बुलंदी संस्था की प्रभारी व कवियत्री गीता मैंदुली ने कहा कि हिंदी भाषा सरल और मधुर है। हिंदी को जन-जन की भाषा बनाने के लिए सामूहिक प्रयास होने चाहिए। उन्होंने स्वरचित कविता का पाठ भी किया। कहा कि भविष्य में यहां राष्ट्रीय स्तर का कवि सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें ख्यातिनाम कवि शामिल होंगे। कवि हरि प्रसाद ममगाईं ने हिंदी भाषा के उत्थान के लिए जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया। कवियत्री भागीरथी कुंजवाल ने बेटियों पर सुंदर रचना प्रस्तुत की। उन्होंने कविता के माध्यम से बताया कि ओलंपिक क्या सेना, हर तरफ बेटियों का ही परचम लहरा रहा है। कवि अनुराग पोखरियाल ने अपनी कविता एक सवाल खुद से... के माध्यम से समाज की विसंगतियों को उजागर किया। आशा रावत ने मानवीय संवेदना पर रचना पढ़ी। इस मौके पर नेहा, ज्योति, योगिता, गीता नेगी, अनीशा, पवन, कृष्णा, संगीता बिष्ट और आरती गुर्साइं आदि मौजूद थे।
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