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राहत कर्मियों से गुप्तकाशी में मांगा सर्टिफिकेट

Wed, 10 Jul 2013 08:34 AM IST
रतनमणी डोभाल
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हरिद्वार नगर निगम के कर्मचारी केदारघाटी में मृतकों के दाहसंस्कार और राहत कार्यों के लिए गए थे, समन्यवय के अभाव से आहत होकर लौटे।
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गुप्तकाशी तक पहुंच कर लौटे इन कर्मचारियों का कहना है कि वहां इनसे सर्टिफिकेट मांगा गया कि साबित करो कि राहत कर्मी हो। कर्मचारियों ने राहत कार्यों में समन्वय के अभाव की बात कही है।

किसी को कुछ पता नहीं
गुप्तकाशी से जैसे-तैसे हरिद्वार लौटे कर्मचारियों ने राहत कार्य की अव्यवस्था की दास्ता बयां की। किसको क्या काम करना है और कहां जाना है किसी को कुछ पता नहीं है। हरिद्वार निवासी बंटी पुत्र रमेश ने बताया कि नगर निगम के छह सफाई कर्मियों और 10 प्राइवेट मजदूरों कुल 16 लोगों को 30 जून को केदारनाथ के लिए कहकर जौलीग्रांट ले जाया गया।
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घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें हेलीकाप्टर में नहीं बैठाया गया और नगर निगम के ट्रक से भद्रकाली मंदिर ऋषिकेश लाया गया। वहां से दो मैक्स गाड़ियों से उन्हें घनसाली पहुंचाया गया। अगले दिन एक जुलाई को वह गुप्तकाशी में ‘चोपट’ के हैलीपैड पहुंचे। जिला प्रशासन ने इन लोगों के साथ न तो हवलदार भेजा और न सुपरवाइजर। जबकि नगर निगम देहरादून ने कर्मचारियों के साथ अधिकारी भी भेजा था।

गुप्तकाशी पहुंचते ही उनसे राहतकर्मी होने का प्रमाण पत्र मांगा गया। हरिद्वार से गए 16 में से आठ लोगों को गुप्तकाशी रोका गया। आठ को गौरीकुंड ले गए। गुप्तकाशी से उन्हें केदारनाथ नहीं ले जाया गया। गुप्तकाशी में उनसे हेलीकाप्टर से सामान उतारने और चढ़ाने का काम कराया गया।

साहब जान बचाकर लौट आने की खुशी है
नगर निगम कर्मचारी सुनील, राजू व दीपक ने बताया कि साहब वहां बुरा हाल है। सही पूछो तो वहां के लोग नहीं जो छोटे कर्मचारी वहां भेजे गए हैं वे आपदा में हैं। अधिकारी मजे ले रहे हैं और कर्मचारियों को खाना भी नसीब नहीं हो रहा है।

पांच दिन गुप्तकाशी में काटने भारी हो गए थे, उन्हें मजबूरी में कीटनाशक दवाई के स्टोर में रहना पड़ा। दीपक पुत्र बाबूराम बीमार होकर लौटा है। इन राहत कर्मियों ने बताया कि साहब जान बचाकर लौट आए हैं यही उनके लिए खुशी की बात है। गुप्तकाशी से उत्तर प्रदेश का एक ट्रक लौट रहा था, जिसने उन्हें हरिद्वार पहुंचाया है।

इलाज करने वाला कोई नहीं
गुप्तकाशी से सोमवार को लौटे राहत दल के कर्मचारी पप्पू, रंजीत व बंटी ने राहत कार्य में समन्वय की पोल खोलते हुए बताया कि राहत कैंप में जो डाक्टर है वह खुद बीमार हो गया है, पर उसको देखने के लिए कोई नहीं जा रहा है न उसे कहीं भेजा जा रहा है। अधिकारी तो मजे ले रहे हैं कर्मचारी रहने-खाने से भी परेशान है।

खाने के लिए 35 प्लेट हैं
खाने के लिए 35 प्लेट हैं। अधिकारी पहले खाते हैं, कर्मचारी प्लेट खाली होने का इंतजार करता है। कर्मचारी साहब की प्लेट देखता रहता है उसे नीचे भी नहीं रखने देते। हाथ से ही लेकर खुद धोकर खाना लेते हैं। खाने में चावल तथा दाल का पानी दिया जा रहा है।

डीआईजी और सीएमओ की गाड़ी से आए
सोमवार को गुप्तकाशी से हरिद्वार पहुंचे बंटी ने बताया कि हम तीन लोग डीआईजी और सीएमओ की गाड़ी में बैठक लौटे हैं। हरिद्वार से भेजते हुए अधिकारियों ने कहा कि था कि उन्हें हेलीकाप्टर से वहां ले जाया जाएगा तथा एक-एक हजार रुपये तथा राशन, कपड़े आदि जरूरी सामान का अलग कोटा दिया जाएगा। लेकिन किसी ने भी नहीं पूछा। ऋषिकेश से घनसाली जाते हुए एक गाड़ी खराब हो गई थी। उसको ठीक कराने के 2700 रुपये भी कर्मचारियों ने अपनी जेब से भरे हैं।

धीरज ने की मदद
गुप्तकाशी में प्रशासन ने ट्रेवल्स की तीन गाड़ियां भी रोक रखी हैं। वे भी परेशान हैं। राजू ने बताया कि टैंपो ट्रेवल्स नंबर 1631 के धीरज ने उनकी तीन दिन तक मदद की। उसी ने खाना खिलाया। एक घर से कढ़ाई मांगकर उसमें रोटी बनाकर खानी पड़ी।

केदारनाथ में शवों का संस्कार करना था
सरकार ने केदारनाथ में आपदा में मरे लोगों के शवों का मलबे से निकालकर अंतिम संस्कार कराने के लिए 30 जून को नगर निगम हरिद्वार व देहरादून से सफाई कर्मियों को भेजने का आदेश दिया था।
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तब नगर निगम के मुख्य नगर अधिकारी जीवन सिंह नागन्याल ने बताया था कि नगर निगम हरिद्वार ने एक टोली नायक के साथ 17 कर्मचारियों को जौलीग्रांट भेजा गया है। लेकिन वापस लौटे कर्मचारियों का कहना है कि उनके साथ कोई अधिकारी नहीं भेजा गया। जौलीग्रांट से हेलीकाप्टर से भी उन्हें नियत स्थान नहीं पहुंचाया गया।

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