पिथौरागढ़ के सुवालेक-रसैपाटा रोड पर हरिनंदा नदी के किनारे स्थित प्राचीन गुफा को अब पर्यटन से जोड़ने की तैयारी होने लगी है।
क्षेत्र के लोग चाहते हैं कि गुफा के पास सुविधाएं जुटाने के लिए पर्यटन विभाग को पहल करनी चाहिए और पुरातत्व विभाग को इस गुफा को संरक्षण के लिए अपने अधीन लेना चाहिए। गुफा के प्रवेश द्वार में पत्थरों से नागों के फन का आकार बना है।
गुफा की लंबाई करीब 300 मीटर है। उसमें नवीं सदी की सूर्य की मूर्ति और विष्णु भगवान की खंडित मूर्ति रखी है। अनुमान लगाया जाता है कि पहले साधुओं ने इस गुफा में साधना की होगी। वह अपने साथ कई मूर्तियों को लेकर आए होंगे। बाद में लोगों ने गुफा के बाहर एक छोटा सा मंदिर बना दिया। खास पर्वों पर लोग गुफा में पूजा अर्चना करते हैं।
स्थानीय निवासी कल्याण सिंह चौहान, आन सिंह चौहान का कहना है कि सरकार नए पर्यटन स्थलों की खोज का अभियान तो चला रही है, लेकिन जिला मुख्यालय के पास स्थित इस गुफा को पर्यटन से जोड़ने की कोई कोशिश नहीं हो रही है।
उन्होंने कहा कि गुफा से थोड़ा दूरी पर चंडिका का मंदिर है। पर्यटक गुफा दर्शन के साथ-साथ चंडिका मंदिर में भी पूजा-अर्चना कर सकते हैं। चंडिका मंदिर रामगंगा के किनारे स्थित है।
पुरातत्व विभाग मदद को तैयार
क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डा. सीएस चौहान का कहना है कि गुफा के संरक्षण और विकास के लिए मदद की जाएगी। इसके लिए मुख्य काम पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन को करना है। यदि दोनों विभाग पुरातत्व विभाग की मदद लेना चाहें तो पूरा सहयोग किया जाएगा। पुरातत्व विभाग ने गुफा का सर्वे कर लिया है और उसमें रखी गई मूर्तियों के बारे में जानकारी भी जुटा रखी है।