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नहीं रहा ‘शेरखान’ को घुड़सवार बनाने वाला

Thu, 03 Oct 2013 08:55 PM IST
अमर उजाला, भवाली
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जंजीर फिल्म के ‘शेरखान’ को घुड़सवारी सिखाने वाले बॉबी रे का बुधवार रात निधन हो गया है। 50 के दशक में मधुमति फिल्म में प्राण के गुरु बनने वाले बॉबी रे को केवल इसी फिल्म से नाम नहीं मिला, बल्कि स्थानीय स्तर पर सामाजिक काम से भी उनकी पहचान मिली।
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91 वर्षीय बाबी रे पिछले कुछ समय से बीमार थे। बुधवार रात करीब 12 बजे उनकी तबियत बिगड़ गई। वह इस स्थिति में नहीं थे कि उन्हें पास ही स्थित सीएचसी ले जाया जा सके।

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अस्पताल की पैदल दूरी 100 मीटर
परजिनों ने सीएचसी पहुंचकर वहां ड्यूटी पर मौजूद डाक्टर से बॉबी को घर पर देखने की प्रार्थना की, लेकिन परिजनों का कहना है कि डाक्टर ने नियमों का हवाला देते हुए मरीज को घर पर देखने से इंकार कर दिया।
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बॉबी के आवास और अस्पताल की पैदल दूरी 100 मीटर के लगभग है। इधर, क्षेत्र के लोगों ने अस्पताल प्रशासन और संबंधित डाक्टर की कार्यप्रणाली पर कड़ी निंदा की है।

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गई स्टेट में हुआ अंतिम संस्कार
दुगई स्टेट निवासी बॉबी का जीवन शुरू से समाज को समर्पित रहा। सामाजिक और धार्मिक क्रियाकलापों में वह बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते थे। जनरल व्हील के परिवार से ताल्लुक रखने वाले बॉबी ने वर्ष 1958 में भवाली, श्यामखेत और आसपास के क्षेत्रों में फिल्माई गई मधुमति की शूटिंग के दौरान प्राण को घुड़सवारी सिखाई थी।

वह अपने पीछे दो बेटे और तीन बेटियां छोड़ गए हैं। बृहस्पतिवार दोपहर बाद दुगई स्टेट में उनका अंतिम संस्कार किया गया। विधायक सरिता आर्या, चेयरमैन नीमा बिष्ट समेत विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने निधन पर दु:ख जताया है।
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